मुंबई: हिंदुस्तान जिंक की नई उत्पादन क्षमताओं, परिचालन सुधारों और तकनीक में किए गए निवेश से कंपनी के प्रदर्शन में मजबूती आ रही है। कंपनी की चेयरपर्सन प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए शेयरधारकों को लिखे पत्र में यह बात कही।
हेब्बर ने कहा, “खनन क्षेत्र में प्रगति को शायद ही कभी किसी एक तिमाही के आधार पर मापा जा सकता है। यह निवेश, नवाचार और अनुशासित क्रियान्वयन के जरिये धीरे-धीरे समय के साथ हासिल होती है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही पर नजर डालने पर मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि हमारे कई दीर्घकालिक निवेश अब ठोस नतीजों में बदल रहे हैं।”
उन्होंने देबारी रोस्टर और चंदेरिया व दरीबा में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए की गई बाधा-निवारण (डीबॉटलनेकिंग) पहलों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन निवेशों से रिफाइंड धातु का उत्पादन बढ़ाने और परिचालन दक्षता में सुधार लाने में मदद मिली है।
सितंबर तिमाही के दौरान हिंदुस्तान जिंक का खनित धातु उत्पादन सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 271 किलो टन (केटी) रहा। वहीं, रिफाइंड धातु का उत्पादन 7 प्रतिशत बढ़कर 264 केटी हो गया। चांदी का उत्पादन भी सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 173 टन पहुंच गया।
कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 77 प्रतिशत बढ़कर 15,093 करोड़ रुपये रहा। एबिटडा 108 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9,285 करोड़ रुपये और कर के बाद मुनाफा (पीएटी) 142 प्रतिशत बढ़कर 6,412 करोड़ रुपये हो गया। रॉयल्टी को छोड़कर जिंक की उत्पादन लागत 29 प्रतिशत घटकर 703 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रह गई।
हेब्बर ने इस बात पर भी जोर दिया कि हिंदुस्तान जिंक का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा, “आगे बढ़ते हुए हमारा लक्ष्य सिर्फ अधिक उत्पादन करना नहीं है। हमारा उद्देश्य उन संसाधनों से अधिक मूल्य सृजित करना है, जिनकी जिम्मेदारी हमारे पास है। साथ ही, ऐसा धातु कारोबार विकसित करना है, जो भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हो और भारत की विकास यात्रा में सार्थक योगदान दे।”
भारत में रणनीतिक खनिजों की बढ़ती जरूरत का उल्लेख करते हुए हेब्बर ने औद्योगिक विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और तकनीकी विकास को समर्थन देने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करने के महत्व पर जोर दिया।
तिमाही के दौरान हिंदुस्तान जिंक को कर्नाटक में गुंडलुपेट रेयर अर्थ एलिमेंट्स एंड यिट्रियम ब्लॉक के लिए आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) मिला। यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इससे महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी मजबूत होगी और भारत के संसाधन भविष्य में उसका योगदान बढ़ेगा।
चेयरपर्सन ने हिंदुस्तान जिंक के परिचालन में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को भी रेखांकित किया। इसमें टेली-रिमोट माइनिंग, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रक्रिया अनुकूलन और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस शामिल हैं। हेब्बर ने बताया कि कंपनी के 62 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाएं, तकनीक और सुरक्षा खनन क्षेत्र के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आगे की रणनीति के बारे में हेब्बर ने कहा कि हिंदुस्तान जिंक का ध्यान परिचालन की मौजूदा गति बनाए रखने, विकास परियोजनाओं को अनुशासित तरीके से पूरा करने, उत्पादकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर रहेगा।
