भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के प्रस्तावित दौरे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। दौरे से ठीक पहले पुलिस प्रशासन द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई ने शहर के राजनीतिक माहौल में गर्माहट पैदा कर दी है। शनिवार सुबह पुलिस टीम ने जिला युवा कांग्रेस महासचिव अभय रामभक्त के निवास पर दबिश देकर उन्हें हिरासत में ले लिया। सुबह लगभग 6:30 बजे हुई इस अचानक कार्रवाई से स्थानीय कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई।
राज्यसभा नामांकन पर विरोध की घोषणा बनी वजह
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस की इस निरोधात्मक कार्रवाई के पीछे केंद्रीय मंत्री के दौरे के दौरान संभावित प्रदर्शन और नारेबाजी को रोकना मुख्य कारण माना जा रहा है। दरअसल, युवा कांग्रेस नेता अभय रामभक्त ने सार्वजनिक रूप से हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने के फैसले का कड़ा विरोध करने की घोषणा की थी। उनका तर्क था कि राज्य से स्थानीय नेताओं के बजाय बाहरी चेहरों को प्राथमिकता देना मध्य प्रदेश की जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हितों के साथ अन्याय है। इसी विरोध प्रदर्शन की आशंका के मद्देनजर प्रशासन ने एहतियातन यह कदम उठाया।
युवा कांग्रेस का तीखा हमला
पुलिस की इस कार्रवाई पर युवा कांग्रेस नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है और सत्ता पक्ष पर प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। युवा कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वतंत्र भारत में हर नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी केंद्रीय मंत्री के आगमन पर जनप्रतिनिधियों और विपक्षी कार्यकर्ताओं की आवाज को पुलिस के दम पर दबाना ही शासन का तरीका बन गया है? संगठन ने इसे लोकतंत्र की आत्मा पर हमला करार दिया।
प्रशासनिक कार्रवाई से उपजा आक्रोश
अचानक हुई इस गिरफ्तारी के बाद युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त हो गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि पुलिसिया दबाव और हिरासत की कार्रवाइयों से कार्यकर्ताओं का मनोबल नहीं टूटेगा। युवा कांग्रेस ने मांग की है कि हिरासत में लिए गए नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाए। राजधानी में मंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी गई है, जबकि दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक तानाशाही बताकर आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बना रहा है।
