आयोडीन की अहमियत को बताने वाला नया कैंपेन आईपीएल फाइनल में हुआ लॉन्च
मुंबई : देश का पसंदीदा नमक ब्रांड टाटा नमक एक बार फिर अपने मशहूर जिंगल “नमक हो टाटा का, टाटा नमक” के जरिए लोगों के दिलों में जगह बना रहा है। इस बार ब्रांड ने बच्चों के मानसिक विकास में आयोडीन की भूमिका को उजागर करने के लिए एक भावनात्मक और प्रभावशाली विज्ञापन अभियान शुरू किया है।
आईपीएल फाइनल के दौरान लॉन्च हुए इस नए कैंपेन में आठ अलग-अलग छोटी कहानियों के माध्यम से बताया गया है कि कैसे टाटा नमक वर्षों से हर भारतीय घर का हिस्सा रहा है – चाहे वो माँ की लोरी हो, किचन में बनती दाल हो या स्कूल में टीचर का पाठ। हर कहानी में टाटा नमक ‘देश का नमक’ बनने का अपना मजबूत दावा करता है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छुपा संदेश
इस अभियान की खास बात है इसका घरेलू और भावनात्मक अंदाज़ – जो हिंदी भाषी राज्यों, बंगाल, और महाराष्ट्र जैसे विविध सांस्कृतिक परिवेशों में रचा-बसा दिखता है। कहानियों में एक टीचर बच्चों को आयोडीन की जरूरत समझाती हैं, तो कहीं एक व्यस्त रसोई में टाटा नमक का स्वाद चुपचाप हर रिश्ते में घुलता है।
क्यों है ये अभियान खास?
टाटा साल्ट की प्रेसिडेंट (पैकेज्ड फूड्स), दीपिका भान कहती हैं,
“ये सिर्फ एक कैंपेन नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ जुड़ाव को और गहरा करने की हमारी कोशिश है। ‘देश का नमक’ हमारे भरोसे और गुणवत्ता की पहचान है, जो दशकों से हर भारतीय के साथ है।”
वहीं कैंपेन के क्रिएटिव डायरेक्टर अनुराग अग्निहोत्री (ओगिल्वी) ने कहा,
“हमने सोचा कि अगर लोगों को आयोडीन के फायदे समझाने हैं, तो क्यों न वो ज़माना फिर से जिया जाए जब एक जिंगल पूरे देश में गूंजता था। हमने उसी अहसास को फिर जीवंत किया है।”
पुरानी धुन में नया संदेश
टाटा नमक का यह नया अभियान सिर्फ एक विज्ञापन नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है – कि बच्चों के मानसिक विकास के लिए सही मात्रा में आयोडीन जरूरी है। और यह जिम्मेदारी उठाई है टाटा नमक ने, जो हर दिन हमारे खाने का हिस्सा बनता है।
📺 इन भावनात्मक कहानियों को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें:
👉 https://youtu.be/43olT6Pj6GY


