झाबुआ, नावेद रजा/ खबर डिजीटल/ जिले की बेटी कृतिका कटारा ने संघर्ष और मेहनत के दम पर सफलता की नई मिसाल पेश की है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली कृतिका ने तमाम कठिनाइयों के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए जरूरी बॉन्ड फीस की चुनौती को झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना ने खुद आगे बढ़कर आसान बनाया।जनसुनवाई में कृतिका ने अपनी आर्थिक स्थिति रखते हुए कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई। कलेक्टर ने तुरंत 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की और कृतिका को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “आपकी मेहनत आने वाले समय में जिले के बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगी। डॉक्टर बनकर जरूर अपने जिले में सेवा दें।
कृतिका कटारा झाबुआ जिले के छोटे से गाँव रातीमाली (पारा) की रहने वाली हैं। बचपन से ही आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। पाँचवीं तक की शिक्षा उन्होंने पारा से, जबकि छठी से बारहवीं तक की पढ़ाई कन्या परिसर कुक्षी से पूरी की।डॉक्टर बनने का सपना देखते हुए कृतिका ने बारहवीं के बाद ऑनलाइन माध्यम से NEET की तैयारी की। आर्थिक कठिनाइयाँ और तकनीकी समस्याएँ भी आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
आखिरकार वर्ष 2025 में उन्होंने NEET परीक्षा में सफलता हासिल की और काउंसलिंग के दौरान उन्हें श्री अरविंदो मेडिकल कॉलेज, इंदौर आवंटित हुआ।हालाँकि, बॉन्ड फीस भरना परिवार के लिए असंभव जैसा था। इसी संकट में कलेक्टर की मदद उनके लिए संजीवनी साबित हुई। सहायता मिलने के बाद कृतिका ने कहा, “यह मदद सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि मेरे सपनों को पंख देने जैसा है।”कृतिका का कहना है कि उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो किसी भी परिस्थिति में सपनों को पूरा किया जा सकता है। उनका लक्ष्य एक समर्पित डॉक्टर बनकर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करना है, जहाँ आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है।


