P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Saturday, April 18, 2026
No menu items!
spot_img
Homeछत्तीसगढ़गरियाबंद में 3 इनामी नक्सलियों का सरेंडर, 2 महिलाएं भी शामिल

गरियाबंद में 3 इनामी नक्सलियों का सरेंडर, 2 महिलाएं भी शामिल

गरियाबंद में 1-1 लाख के ईनामी तीन माओवादी ने किया आत्मसमर्पण किया।

गरियाबंद/ मनमोहन नेताम /खबर डिजिटल

गरियाबंद में 1-1 लाख के ईनामी तीन माओवादी ने किया आत्मसमर्पण कर दिया। नागेश कवासी, जैनी मडकम और मनीला कवासी ने हथियार सहित समर्पण किया। तीनों डीजीएन डिवीजन और ओडिशा स्टेट कमेटी से जुड़े सक्रिय माओवादी थे। मेटाल मुठभेड़ सहित कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे थे। इन्होंने माओवादी संगठन की खोखली विचारधारा से निराश होकर आत्मसमर्पण किया। शासन की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे।

तीनों सरेंडर करने वाले नक्सली लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे। मेटाल मुठभेड़ सहित कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल थे। इन्होंने गरियाबंद पुलिस के समर्पण अपील और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया। सरेंडर करने वाले 3 नक्सलियों में 2 महिला हैं, जोकि नक्सली वारदातों में शामिल रही थी।

जानिये आखिर कौन हैं आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली?

  1. नागेश उर्फ रामा कवासी: बीजापुर जिले के तर्रेम गांव का निवासी है। जोकि 2022 में माओवादी संगठन में भर्ती हुआ था। इसकी कई मुठभेड़ों में शामिल होने के साथ मेटाल मुठभेड़ में भी सक्रिय भूमिका थी। वो डीव्हीसी-डमरू के गार्ड के रूप में कार्यरत रहा है।
  2. जैनी उर्फ देवे मडकम: बीजापुर जिले के इतगुडेम गांव की निवासी है। 2016 में जनमिलिशिया से शुरुआत की। 2017 में संगठन की सदस्य बनी। प्रमोद उर्फ पाण्डु (ओडिशा स्टेट कमेटी सदस्य) की गार्ड रही है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कई मुठभेड़ों में शामिल रही।
  3. मनीला उर्फ सुंदरी कवासी: बीजापुर जिले के जैगूर गांव की निवासी है। 2020 में संगठन में भर्ती, कृषि कार्य से शुरुआत की। सीसी-चलपति उर्फ जयराम की गार्ड रही। सीनापाली एरिया कमेटी में सक्रिय, कई मुठभेड़ों में शामिल थी।

क्यों छोड़ा माओवादी संगठन?
सरेंडर करने वाले तीनों नक्सलियों ने बताया कि संगठन की विचारधारा खोखली हो चुकी है। निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, अवैध वसूली और शोषण आम बात हो गई। जंगल में दर-दर भटकने और बड़े माओवादियों की गुलामी से तंग आ चुके थे। आत्मसमर्पित साथियों का खुशहाल जीवन देखकर उन्हें प्रेरणा मिली कि अब लाल आतंक का साथ छोड़ दिया जाए।

आत्मसमर्पण की अपील
इस आत्मसमर्पण में गरियाबंद पुलिस के साथ STF, Cobra 207 और CRPF की अहम भूमिका रही है। साथ ही गरियाबंद पुलिस ने सभी सक्रिय माओवादियों से अपील की है कि वे किसी भी थाना, चौकी या कैम्प में जाकर आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

अमित शाह भी कर चुके अपील
4 अक्टूबर को बस्तर दौरे पर रहे अमित शाह ने भी नक्सलियों से अपील की थी कि छत्तीसगढ़ और केंद्र दोनों सरकारें बस्तर और सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। एक आकर्षक समर्पण और पुनर्वास नीति लागू की गई है। जिसमें था कि आगे आएं और अपने हथियार डाल दें।

2 अक्टूबर को ऐतिहासिक सरेंडर
नक्सलियों के सरेंडर करने की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीजापुर जिले में अब तक का सबसे बड़ा सरेंडर हुआ। 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ से ज्यादा का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वाले 5 नक्सलियों पर 8-8 लाख का इनाम था।

24 सितंबर को 71 नक्सलियों ने डाले हथियार
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की लगातार हो रही कार्रवाई का असर नक्सल संगठन पर व्यापक तौर पर दिखने लगा है। एंटी नक्सल ऑपरेशन के तहत दंतेवाड़ा में एक साथ कुल 71 नक्सलियों ने हथियार डाले। जिन्होंने लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में तीन नक्सली नाबालिग भी हैं।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट