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एमएसएमई सेक्टर में ऋण वितरण में 13% की सालाना बढ़त, डिफॉल्ट दर पाँच साल के न्यूनतम स्तर पर

मुंबई। देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में एमएसएमई वाणिज्यिक ऋण पोर्टफोलियो में 13% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। ट्रांसयूनियन सिबिल और सिडबी द्वारा जारी MSME पल्स रिपोर्ट (मई 2025) के मुताबिक, मार्च 2025 तक कुल एमएसएमई ऋण एक्सपोजर ₹35.2 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जो एक साल पहले ₹31 लाख करोड़ था।

इतना ही नहीं, गंभीर चूक की दर भी घटी है — मार्च 2025 में यह 1.8% रही, जो बीते पाँच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। यह ट्रेंड खासतौर पर ₹50 लाख से ₹50 करोड़ तक के एक्सपोजर वाले उधारकर्ताओं में ऋण प्रदर्शन में सुधार की वजह से देखा गया है।

छोटे उधारकर्ताओं में डिलिंक्वेंसी में थोड़ी वृद्धि

हालांकि, ₹10 लाख तक के एक्सपोजर वाले एमएसएमई उधारकर्ताओं में डिफॉल्ट दर बढ़कर 5.8% हो गई, जो मार्च 2024 में 5.1% थी। ₹10 लाख से ₹50 लाख तक की श्रेणी में भी मामूली वृद्धि (2.8% से बढ़कर 2.9%) देखी गई।

क्रेडिट मांग और सप्लाई में बदलाव

मार्च 2025 में समाप्त तिमाही के दौरान क्रेडिट की मांग में 11% वृद्धि देखी गई, जबकि ऋण वितरण में 11% गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट उधारदाताओं की सतर्कता और बाहरी आर्थिक जोखिमों के कारण आई।

फिर भी, नई नकद क्रेडिट सुविधाओं के जरिए वितरण में 7% की सालाना वृद्धि बनी रही। कुल नए ऋण वितरणों में न्यू-टू-क्रेडिट (पहली बार ऋण लेने वाले) एमएसएमई की हिस्सेदारी 47% रही, जो एक साल पहले 51% थी।

सार्वजनिक बैंक सबसे आगे

जनवरी से मार्च 2025 की तिमाही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने न्यू-टू-क्रेडिट ऋण का 60% हिस्सा वितरित किया। व्यापार क्षेत्र में इन नए उधारकर्ताओं की भागीदारी 53% रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में 70% की YoY वृद्धि दर्ज की गई।

मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी घटी

नई ऋण वितरण की संख्या में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 23% रहा, जबकि मूल्य के लिहाज से इसकी हिस्सेदारी 34% थी। पिछले दो वर्षों में इसमें गिरावट देखी गई है, और अब पेशेवर सेवाएं और अन्य सेवाएँ अधिक आकर्षण का केंद्र बन रही हैं, जो अब कुल वितरण मूल्य का 36% हिस्सा बनाती हैं।

राज्यवार योगदान

महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से कुल वाणिज्यिक ऋण वितरण का 48% आया। जहाँ महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ज़्यादा क्रेडिट मिला, वहीं उत्तर प्रदेश में ट्रेड सेक्टर सबसे आगे रहा।


विशेषज्ञों की राय

सिडबी के चेयरमैन और एमडी मनोज मित्तल ने कहा:
“एमएसएमई क्षेत्र देश के आर्थिक विकास, रोजगार और निर्यात वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस क्षेत्र में ऋण प्रवाह बेहतर हुआ है, लेकिन अब भी एक क्रेडिट गैप बना हुआ है, जिसे भरने की ज़रूरत है।”

ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने जोड़ा:
“एमएसएमई को फॉर्मल क्रेडिट तक पहुँच और ऋण प्रबंधन में सहायता देने की आवश्यकता है, क्योंकि ये उद्यम अक्सर आर्थिक झटकों से असमान रूप से प्रभावित होते हैं।”

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