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राइज़िंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट में वेदांता का बड़ा ऐलान – पूर्वोत्तर में ₹80,000 करोड़ का निवेश करेगा समूह

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत की संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए, वेदांता ग्रुप ने क्षेत्र में ₹80,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित राइज़िंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025 के उद्घाटन समारोह के दौरान समूह के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने की।

वेदांता का यह निवेश छह उत्तर-पूर्वी राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय, मिज़ोरम और असम – में महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों, ऊर्जा, विद्युत संचरण और तकनीकी परियोजनाओं में होगा।

पूर्वोत्तर को विकास का इंजन बनाने की तैयारी

श्री अनिल अग्रवाल ने कहा,
“प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर दो अंकों की विकास दर हासिल कर रहा है। यह क्षेत्र अब विकसित भारत के निर्माण का मुख्य इंजन बन चुका है। वेदांता इस समृद्ध क्षेत्र में ऊर्जा, खनिज और तकनीक के क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रतिबद्ध है।”

नौकरियों के नए अवसर और सामाजिक पहलें

वेदांता द्वारा प्रस्तावित इस निवेश से एक लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। साथ ही, समूह अपने सामाजिक प्रयासों जैसे नंदघर (आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र), हैंडलूम स्किल सेंटर, डिजिटल क्लासरूम, और खेलों को बढ़ावा देने के ज़रिये क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी ज़ोर देगा।

खनिज, ऊर्जा और हाइड्रोकार्बन में बड़े मौके

पूर्वोत्तर में तेल, गैस, ग्रेफाइट, वेनेडियम और जलविद्युत की प्रचुरता है। वेदांता की अनुषंगी कंपनी कैयर्न ऑयल एंड गैस, असम के हज़ारीगांव फील्ड से उत्पादन कर रही है — जो क्षेत्र का पहला डीएसएफ (Discovered Small Field) प्रोजेक्ट है। इस क्षेत्र की गैस से स्थानीय चाय उद्योग और 100 से अधिक CNG बसों को ऊर्जा मिल रही है।

हाल ही में वेदांता ने अरुणाचल प्रदेश में ग्रेफाइट और वेनेडियम के खनिज ब्लॉक्स भी हासिल किए हैं, जो भारत की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए अहम साबित होंगे।

बिजली और आधारभूत ढांचे में भी योगदान

समूह ने असम से मेघालय तक 300 किलोमीटर लंबा ट्रांसमिशन नेटवर्क भी विकसित किया है, जिससे 100 मेगावाट बिजली का हस्तांतरण संभव होगा। इससे दोनों राज्यों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे औद्योगिक और सामाजिक विकास को बल मिलेगा।

सामाजिक और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताएं

वेदांता क्षेत्र में हैंडलूम केंद्रों और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से अब तक 300 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुका है। साथ ही, काजीरंगा नेशनल पार्क के साथ साझेदारी कर वन्यजीवन संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पूर्वोत्तर भारत अब सिर्फ एक रणनीतिक क्षेत्र नहीं बल्कि ऊर्जा, खनिज, सामाजिक विकास और सतत भविष्य का नया केंद्र बनता जा रहा है। वेदांता का यह निवेश क्षेत्र के लिए गति और गरिमा दोनों लेकर आएगा।

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