Monday, November 2, 2026
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चार दिन की कार्रवाई या लंबी चलेगी मुहिम? 158 पशु बरामदगी के बाद पशु तस्करी के नेटवर्क पर सवाल

खबर डिजिटल न्यूज़ कटनी– जिले में पशुओं के अवैध और कथित क्रूरतापूर्ण परिवहन का एक और मामला सामने आया है। कुठला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक ट्रक से 158 बकरा-बकरियों को बरामद कर चार लोगों को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार पशुओं को क्षमता से अधिक संख्या में भूखे-प्यासे और क्रूरतापूर्वक ठूंसकर ले जाया जा रहा था। बरामद पशुओं की अनुमानित कीमत करीब तीन लाख रुपये बताई गई है।पुलिस के मुताबिक 20 अगस्त 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि MP20XB8464 नंबर के ट्रक में बकरा-बकरियों को पटेहरा की ओर से कटनी लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर कुठला पुलिस ने देवडोगरा मोड़ पर घेराबंदी कर ट्रक को रोका। जांच के दौरान ट्रक में 158 बकरा-बकरियां मिलीं। पुलिस का दावा है कि वाहन में पशुओं को निर्धारित क्षमता से अधिक संख्या में ठूंसकर रखा गया था और उनके परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज या अनुज्ञापत्र भी प्रस्तुत नहीं किए गए।पूछताछ में पशुओं को हैदराबाद ले जाने की बात सामने आई। पुलिस ने मौके से अफसर उर्फ राजा, बल्लू वर्मन, रजी और सुनील कुशवाहा को पकड़ा तथा ट्रक और सभी 158 पशुओं को जब्त किया। पशुओं को सुरक्षित देखरेख के लिए हिफाजतनामा पर सुपुर्द कर चिकित्सीय परीक्षण भी कराया गया।पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 742/26 दर्ज करते हुए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(घ) तथा मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है।कार्रवाई बड़ी, लेकिन सवाल उससे भी बड़ाकुठला पुलिस की कार्रवाई निश्चित तौर पर पशुओं को कथित क्रूरतापूर्ण परिवहन से मुक्त कराने की दिशा में अहम कदम है, लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ एक ट्रक पकड़ने और चार लोगों को हिरासत में लेने तक सीमित रहेगी, या फिर उस नेटवर्क की जड़ तक भी पहुंचा जाएगा जो कथित तौर पर पशुओं को एक जिले से दूसरे जिले और राज्यों तक पहुंचाने में सक्रिय है?सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यदि पशुओं के परिवहन के लिए दस्तावेज और अनुमति नहीं थे, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर 158 पशु लेकर वाहन सड़क पर कैसे निकल गया? ट्रक कहां से रवाना हुआ, रास्ते में किन-किन स्थानों से गुजरा, पशुओं को किसने एकत्र किया, इन्हें किसके पास पहुंचाया जाना था और इस पूरे परिवहन के पीछे असली संचालक कौन है—इन सवालों के जवाब जांच में सामने आना जरूरी हैं।चार आरोपी पकड़े, क्या असली नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच?पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा है, लेकिन क्या यही इस कथित अवैध परिवहन के पूरे नेटवर्क का हिस्सा हैं या केवल वाहन में मौजूद लोग? यह जांच का अहम बिंदु है। यदि पशुओं को हैदराबाद ले जाने की बात पूछताछ में सामने आई है, तो पुलिस को परिवहन के पीछे मौजूद कथित खरीदार, सप्लायर, बिचौलियों और अन्य जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल करनी होगी।अन्यथा हर बार एक वाहन पकड़ने, कुछ लोगों पर मामला दर्ज करने और फिर मामला ठंडे बस्ते में जाने का सिलसिला जारी रहा तो कथित पशु तस्करी का कारोबार रोकना मुश्किल होगा।पुलिस की कार्रवाई के बाद निगरानी कितनी मजबूत?पुलिस ने कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता और अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि क्या आने वाले दिनों में ऐसे परिवहन पर लगातार निगरानी और कार्रवाई होती है या फिर कुछ दिनों बाद मामला सुर्खियों से गायब हो जाएगा।कटनी जैसे महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों से होकर दूसरे राज्यों की ओर जाने वाले वाहनों की जांच, पशु परिवहन के दस्तावेजों का सत्यापन और संदिग्ध वाहनों की लगातार निगरानी जरूरी है। सिर्फ एक-दो कार्रवाई से इस कथित अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाना संभव नहीं होगा।कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरीकुठला पुलिस की कार्रवाई में निरीक्षक अखलेश दाहिया के नेतृत्व में सहायक उप निरीक्षक तीरथ तेकाम, प्रधान आरक्षक केशव मिश्रा, सुनील पाण्डेय, आरक्षक शिशिर पाण्डेय सहित पुलिस स्टाफ की भूमिका बताई गई है। पुलिस ने पशुओं का चिकित्सीय परीक्षण भी कराया है।अब असली परीक्षा आगे की जांच और कार्रवाई की है। क्या पुलिस बरामद 158 पशुओं के स्रोत और गंतव्य की पूरी कड़ी खंगालेगी? क्या वाहन के मालिक और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचेगी? क्या यह पता लगाया जाएगा कि इससे पहले भी इसी तरह का परिवहन हुआ था या नहीं?158 पशुओं की बरामदगी के बाद मामला सिर्फ चार आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क है तो उसकी पहचान कर उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई ही इस पूरी कार्रवाई का वास्तविक परिणाम मानी जाएगी। वरना सवाल बना रहेगा—कुछ दिन कार्रवाई की सुर्खियां और फिर वही रास्ते, वही ट्रक और वही कथित पशु तस्करी का कारोबार?

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