Monday, November 2, 2026
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भोपाल में ‘इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव’ संपन्न: पीएम-सेतु योजना के जरिए आईटीआई (ITI) इकोसिस्टम में आएगा क्रांतिकारी बदलाव

भोपाल : भारत के स्किलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) ने भोपाल में दो दिवसीय ‘इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव’ की मेज़बानी की। यह कॉन्क्लेव पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआईज़) योजना को गति देने के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को सीधे उद्योगों की मांग से जोड़ने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

मंत्रालय की सचिव श्रीमती देवश्री मुखर्जी ने वर्चुअली कॉन्क्लेव की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि पीएम-सेतु केवल एक अपग्रेडेशन प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक सुधार है। उन्होंने कहा कि यह योजना उद्योगों को शासन व्यवस्था के केंद्र में रखती है, जिससे पार्टनर कंपनियों को आईटीआई क्लस्टरों के प्रबंधन और प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने का पूरा अधिकार मिलता है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आईटीआई से निकलने वाले युवा न केवल नौकरी के लिए तैयार हों, बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप ‘भविष्य के लिए भी तैयार’ हों।

कॉन्क्लेव की मुख्य विशेषताएं और प्रगति:

  • दिग्गज कंपनियों की भागीदारी: आर्सेलर मित्तल, बीएचईएल (BHEL), टाटा पावर, आईटीसी, और अल्ट्राटेक सीमेंट सहित 20 से अधिक प्रमुख उद्योग संगठनों ने इस पहल का समर्थन किया।
  • वैश्विक साझेदारी: भारत के तकनीकी प्रशिक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए फ्रांस (एयरोनॉटिक्स), जर्मनी (रिन्यूएबल एनर्जी) और सिंगापुर (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • राज्यों की सक्रियता: अब तक 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपग्रेडेशन के लिए क्लस्टर्स की पहचान कर ली है और 31 राज्यों ने अपनी स्टीयरिंग कमेटियां बना ली हैं।
  • क्षमता निर्माण: 27 राज्यों के 100 आईटीआई प्रिंसिपलों को नई शासन व्यवस्था और उद्योग जुड़ाव के लिए विशेष नेतृत्व प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

इंडस्ट्री लीडर्स ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पीएम-सेतु के माध्यम से उन्हें मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में टैलेंट की कमी को दूर करने के लिए अपनी जरूरतों के हिसाब से करिकुलम (पाठ्यक्रम) बनाने की लचीलापन मिलेगी। यह कॉन्क्लेव भारत के विकास और रोजगार क्षमता के एजेंडे को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ है।

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