मुरैना/ शुभम कुलश्रेष्ठ/ खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) की बोर्ड परीक्षाएं मंगलवार से प्रदेशभर में शुरू हो गई हैं। परीक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं में जबरदस्त उत्साह और थोड़ी घबराहट का मिला-जुला माहौल देखा गया। सुबह से ही केंद्रों के बाहर विद्यार्थियों का तांता लगा रहा। हाथ में एडमिट कार्ड और मन में बेहतर परिणाम की उम्मीद लिए बच्चे समय से पहले ही केंद्रों पर पहुंच गए थे। लेकिन परीक्षा शुरू होते ही जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने सिस्टम की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्साह पर भारी पड़ती बदहाली
राजधानी सहित कई जिलों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां छात्र जमीन पर बैठकर पर्चा हल करने को मजबूर दिखे। एक ओर शासन ‘डिजिटल शिक्षा’ और ‘आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में बुनियादी फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं हो सकी। सर्द फर्श पर बैठकर परीक्षा देते छात्र शिक्षा विभाग की उस लापरवाही को उजागर कर रहे हैं, जिसे अमूमन फाइलों में छिपा लिया जाता है।
व्यवस्थाओं पर खड़े होते सवाल
परीक्षा केंद्रों के बाहर बच्चों के चेहरे पर आत्मविश्वास तो था, लेकिन अंदर की अव्यवस्था ने प्रशासन की पोल खोल दी। अभिभावकों का कहना है कि साल भर की मेहनत के बाद जब बच्चा ऐसे माहौल में परीक्षा देता है, तो उसकी एकाग्रता पर असर पड़ता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इन खामियों का संज्ञान लेंगे? या फिर ‘सब ठीक है’ के नारों के बीच छात्र इसी तरह अव्यवस्थाओं के साये में अपना भविष्य लिखने को मजबूर रहेंगे। फिलहाल, यह स्थिति सरकार के उन दावों को चुनौती दे रही है जिनमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया जाता है।
