डिंडौरी/ शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ जिला चिकित्सालय में दो महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों के निलंबन ने तूल पकड़ लिया है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने इस कार्रवाई को “एकतरफा” और “दमनकारी” करार देते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निलंबन आदेश तत्काल निरस्त नहीं किया गया, तो जिले की स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ 5 फरवरी की वह घटना है, जिसमें रवींद्र मरावी नामक एक गंभीर मरीज को जिला अस्पताल से जबलपुर रेफर किया गया था। दुर्भाग्यवश, रास्ते में ही मरीज की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए फार्मासिस्ट विमला द्विवेदी और नर्सिंग ऑफिसर जयमति नंदेहा को निलंबित कर दिया गया।
कर्मचारी संघ के गंभीर आरोप
संघ का आरोप है कि प्रशासन ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ताक पर रखकर कार्रवाई की है। बिना किसी “कारण बताओ नोटिस” या निष्पक्ष जांच के सीधे निलंबन करना मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है। संघ के नेताओं का कहना है कि प्रशासन अपनी व्यवस्थागत खामियों को छिपाने के लिए महिला कर्मचारियों को “बलि का बकरा” बना रहा है।
साधनों की कमी नहीं थी: निलंबित कर्मचारी
निलंबित फार्मासिस्ट विमला द्विवेदी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका कार्य दवाओं और सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेफरल के समय ऑक्सीजन या अन्य किसी सामग्री की कमी नहीं थी। बिना जांच के की गई इस कार्रवाई से कर्मचारियों का मनोबल टूटा है।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के संरक्षक राजकुमार साहू ने कड़े शब्दों में कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात सेवा दे रहे हैं। यदि प्रशासन ने न्याय नहीं किया और निलंबन वापस नहीं लिया, तो कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


