छिदवाड़ा/तौफीक मिस्कीनी/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में इन दोनों कंबल वाले बाबा की चर्चा चल रही है, इसके पीछे की वजह यह है कि बाबा हर बीमारी का इलाज करने का दावा कर रहे हैं, और पहुंचने वाले मरीजों को काला कंबल ओढाकर इलाज कर रहे हैं। तेल और अश्वगंधा का पाउडर मरीजो को दिया जा रहा हैं। ये खेल पिछले आठ दिनों से चल रहा है लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है, प्रशासन बाबा के द्वारा लगाए गए शिविर सैकड़ो की संख्या में इलाज करने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। छिंदवाड़ा के हर्रई आदिवासी इलाके में 5 दिन का शिविर लगाकर लोगों का इलाज किया जा रहा था। जिसके बाद छिंदवाड़ा चंदनगांव में 5 दोनों का शिविर लगाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं। प्रशासन को इस बात की जैसे ही भनक लगी तो शुक्रवार की देर रात स्वास्थ्य विभाग की टीम शिविर में पहुंची, और बाबा के द्वारा दिया जा रहा अश्वगंधा का डिब्बा और तेल का सैंपल लिया। वहीं जब परमिशन मांगी गई तो कोई परमिशन नहीं मिली है। कंबल वाले बाबा के द्वारा बिना प्रशासन की परमिशन के शिविर लगाया जा रहा था, इस बात की पुष्टि जब हुई जब स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने पहुंची।
छिंदवाड़ा में आठ दिनों से लग रहा है कंबल बाले बाबा का शिविर
छिंदवाड़ा जिले के हर्रई क्षेत्र क्षेत्र के बाद अब छिंदवाड़ा के चंदनगांव में सैकड़ो की संख्या में कंबल वाले बाबा के शिविर में भीड़ उमड रही हैं। जिसमें कंबल वाले बाबा के नाम से फेमस गणेश यादव पहुंचने वाले मरीजों को ठीक करने का दावा कर रहे है। उनका कहना है कि पिछले 50 सालों से बीमारी को ठीक करते हैं। उनका कहना है कि 4 साल की उम्र से ही मरीजों को ठीक करते हैं उनके पास चमत्कारी कंबल है, जो गंभीर से गंभीर बीमारी को ठीक कर देता है। निरंतर 50 वर्षों से गंभीर बीमारियों सहित शरीर से जुड़ी हुई समस्त बीमारियों का इलाज कर रहे हैं।
देर रात पहुंचे थे सीएमएचओ नरेश गोन्नाने
चंदनगांव में बाबा के द्वारा लगाए गए शिविर में स्वास्थ्य विभाग की जांच करने पहुंची थी, इस दौरान उनके पास से मरीज को दिया जा रहा तेल और अश्वगंधा के पाउडर के सैंपल लिए गए, और जांच करने की बात कही है। इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए सीएमएचओ नरेश गोन्नाने बताया कि इन्होंने प्रशासन से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली है, जब तक प्रशासन से अनुमति नहीं लेंगे, तब तक ऐसा कैंप लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, इसीलिए प्रशासन के द्वारा जांच की जा रही है। इनको किसी प्रकार की खाने की दवाई का वितरण करने के लिए मना किया गया है। साथ कहा कि जांच में अश्वगंधा का चूर्ण और तेल जब्त किया गया है, जिसकी जांच कराई जाएगी।
आस्था है या फिर अंधविश्वास!
लोगों का मानना है कि अगर कंबल से बीमारियां ठीक होने लगी तो फिर आधुनिक शिक्षा और रिसर्च की आवश्यकता नहीं है, फिर रिसर्च क्यों की जाती है। इस तरह से लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो प्रशासन को रोक लगानी चाहिए, ताकि विश्वास या अंधविश्वास का खेल बंद हो सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ने अश्वगंधा और तेल का वितरण करने पर रोक लगाई है, तो इस पर अमल होगा या नहीं, यह तो आने वाला ही समय तय करेगा।वहीं यह बाबा का चमत्कार है या फिर अंधविश्वास यह पढ़ने वाले पाठक ही तय करें।
