डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ अमरपुर, डिंडोरी जिले से विकास की एक बड़ी खबर सामने आई है। अमरपुर विकासखंड के दुर्गम पहाड़ी गाँव चंद्रगढ़ में आजादी के 70 साल बाद पहली बार हर घर तक नल से शुद्ध पानी पहुंचा है।
अब तक इस गाँव के बैगा आदिवासी परिवारों को पीने के पानी के लिए रोज कई किलोमीटर दूर पहाड़ से नीचे उतरकर ‘झिरिया’ यानी प्राकृतिक जल स्रोत पर जाना पड़ता था। बरसात में रास्ते फिसलन भरे हो जाते थे और गर्मी में झिरिया भी सूख जाती थी।
चार महीने पहले जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया गाँव की समस्याएं सुनने के लिए चंद्रगढ़ पहुंची थीं। वहाँ उन्होंने चौपाल लगाई।
चौपाल में गाँव की महिलाओं ने रोते हुए बताया कि आजादी के इतने साल बाद भी उन्हें एक-एक बूंद पानी के लिए पूरा दिन भटकना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई और घर के काम पर भी इसका असर पड़ता था।
कलेक्टर ने ग्रामीणों की बात को गंभीरता से लिया और उसी दिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अफसरों को बुलाया। उन्होंने साफ कहा कि चंद्रगढ़ में हर हाल में पानी पहुंचाना है और इसमें देरी नहीं होनी चाहिए।
कलेक्टर के आदेश के बाद प्रशासन ने तुरंत काम शुरू कर दिया। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत गाँव में तेजी से काम हुआ।
चंद्रगढ़ पहाड़ पर बसा है और रास्ते बहुत कठिन हैं। फिर भी विभाग ने 120 दिन यानी करीब 4 महीने में पूरे गाँव में पाइप लाइन बिछा दी। ऊंचाई वाले घरों तक पानी पहुंचाने के लिए खास इंतजाम किए गए। अब गाँव के हर घर में नल लगा है और उसमें साफ पानी आ रहा है।
चंद्रगढ़ में ज्यादातर बैगा जनजाति के लोग रहते हैं। बैगा जनजाति को सरकार ने ‘विशेष पिछड़ी जनजाति’ माना है।और उन्हें” राष्ट्रीय मानव ” का भी दर्जा प्राप्त हैं।
अब महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए घंटों पैदल नहीं चलना पड़ता। यह समय अब वे बच्चों की पढ़ाई और दूसरे कामों में लगा रहे हैं। पहले झिरिया का गंदा पानी पीने से लोग अक्सर बीमार पड़ जाते थे। अब नल से साफ पानी मिलने से गाँव में बीमारी कम होगी। पानी जैसी जरूरी चीज के लिए अब किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।
नल से पानी आने के बाद पूरे गाँव में जश्न का माहौल है। गाँव की बुजुर्ग महिला सुखिया बाई कहती हैं, “हमने तो आस ही छोड़ दी थी। सोचा था कि हमारे बच्चों को भी यही तकलीफ देखनी पड़ेगी। पर अब लगता है भगवान ने सुन ली।”
गाँव के सरपंच ने जिला प्रशासन और सरकार का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि अगर अफसर चाहें तो सबसे कठिन काम भी आसान हो जाता है।
चंद्रगढ़ की यह कहानी बाकी गाँवों के लिए भी एक मिसाल है। यह साबित करती है कि सही नीयत और मेहनत से विकास की रोशनी हर कोने तक पहुंच सकती है।
