MP Congress: राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मेलन में उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ ने अपनी ही पार्टी की पूर्व सरकार पर हमला बोला। साधौ ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के दौरान का एक ऐसा सच उजागर किया है, जिससे कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवालिया निशान लग गए हैं।
विजयलक्ष्मी साधौ ने लपेटा…
विजयलक्ष्मी साधौ ने मंच से दहाड़ते हुए कहा कि जब अविभाजित मध्य प्रदेश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव आया था, तब दिग्विजय कैबिनेट के कई धुरंधर इसके सख्त खिलाफ थे। साधौ ने सीधे तौर पर तत्कालीन दिग्गज नेताओं के नाम लेते हुए सनसनी फैला दी। उन्होंने कहा आगे कहा कि सुभाष यादव, राजेन्द्र शुक्ला और प्यारेलाल कंवर जैसे बड़े नेता आरक्षण के विरोध में थे। इन नेताओं का मानना था कि जो महिलाएं किचन और घूंघट से बाहर नहीं आतीं, उन्हें आरक्षण देने का क्या फायदा? साधौ ने आगे कहा कि जब चुनाव हुए, तो उन्हीं महिलाओं ने अपनी ताकत दिखाई और 33 फीसदी के मुकाबले 38 प्रतिशत सीटें जीतकर विरोधियों के मुंह बंद कर दिए।
टिकट आवंटन पर निशाना
साधौ यहीं नहीं रूकी, उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने खुलासा किया कि जब वे एआईसीसी सचिव थीं, तब महिलाओं को केवल उन्हीं सीटों पर टिकट दिया जाता था जहां कांग्रेस पिछले चार-पांच चुनावों से लगातार हार रही थी। महिलाओं को केवल बलि का बकरा बनाने के लिए कठिन सीटों पर उतारा जाता था।
पार्टी के अंदर मची खलबली
देशभर में जहां कांग्रेस महिला आरक्षण को लेकर भाजपा को घेर रही है, वहीं पार्टी की अपनी ही सीनियर लीडर द्वारा दिग्विजय काल के इस कड़वे सच को उजागर करने से वरिष्ठ नेताओं में हड़कंप मच गया है। इस बयान ने पार्टी के अंदर महिलाओं की स्थिति और पुराने नेताओं की मानसिकता पर बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि दिग्विजय सिंह और अन्य संबंधित नेता इस खुलासे पर क्या सफाई देते हैं।


