MP E-Attendance: मध्यप्रदेश में ई अटेंडेंस अब शिक्षकों की मुसिबत बनती जा रही है। हाल ही में बैतूल से एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जिले में राज्य शासन द्वारा अनिवार्य की गई ई-हाजिरी अब शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गई है। जिले के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी नही होने के चलते 375 शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है।
नेटवर्क की तलाश बना चुनौती
बैतूल के दूर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में हमारे शिक्षक ऐप पर हाजिरी दर्ज करना किसी चुनौती से कम नहीं है। इंटरनेट सिग्नल न मिलने के कारण शिक्षकों को स्कूल छोड़कर कई किलोमीटर दूर ऊंचे स्थानों या पहाड़ियों पर चढ़ना पड़ रहा है ताकि वे अपनी सेल्फी और लोकेशन दर्ज कर सकें। इतना ही नहीं सुबह के समय जब हजारों शिक्षक एक साथ ऐप का उपयोग करते हैं, तो सर्वर इतना धीमा हो जाता है कि हाजिरी लगाने में ही 2 से 3 घंटे बर्बाद हो रहे हैं।
बच्चों को पढ़ाएं या सिग्नल ढूंढें?
शिक्षकों का सवाल वाजिब है कि अगर वे दिन का आधा समय नेटवर्क तलाशने में बिताएंगे, तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा? इसी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी मोबाइल लोकेशन मैच न होने के कारण अधिकारियों की फटकार और वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामियों की सजा उन्हें सैलरी रोककर के रूप में दी जा रही है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
375 शिक्षकों पर गिरी गाज
हाजिरी दर्ज न होने को अनुशासनहीनता मानते हुए विभाग ने जिले के 375 शिक्षकों का वेतन रोक दिया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शासन के निर्देश हैं कि ई-अटेंडेंस अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जहां नेटवर्क मिले, वहां से हाजिरी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, नेटवर्क की समस्या को देखते हुए वरिष्ठ कार्यालय से बात की जा रही है।
समाधान की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक हर गांव में हाई-स्पीड इंटरनेट नहीं होता, तब तक ऐसी कार्रवाई तुरंत रोकी जानी चाहिए। प्रशासन को ऑफलाइन मोड या मैनुअल अटेंडेंस पर विचार करना होगा, ताकि शिक्षकों का ध्यान नेटवर्क के बजाय पढ़ाई पर रहे।


