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दमोह पुलिस की लापरवाही: घटनास्थल पर लावारिस पड़े दुर्घटनाग्रस्त वाहनों से सामान चोरी

बढ़ रहा हादसों का खतरा

दमोह/वैभव नायक/खबर डिजिटल/जिले में सड़क हादसों के बाद पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। दुर्घटना का शिकार हुए वाहन हफ्तों और महीने तक घटनास्थल पर ही लावारिस पड़े रहते हैं, जिसका फायदा उठाकर अज्ञात चोर उनके कीमती पार्ट्स चोरी कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सूचना के बावजूद पुलिस इन वाहनों को न तो अपनी अभिरक्षा में ले रही है और न ही इन्हें सड़क से हटवा रही है, जिससे दोबारा हादसे होने का डर बना हुआ है।

यह मामले आए सामने
मामला 1: जुलाई माह में पाजी के समीप बंदरों को बचाने के चक्कर में एक नई बोलेरो कार पेड़ से टकरा गई थी। हादसे में तेजगढ़ थाना अंतर्गत माडनखेड़ा निवासी दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घायलों को उपचार के लिए रेफर किया गया और पुलिस को सूचना दी गई। इसके बावजूद पुलिस ने वाहन को मौके से नहीं हटाया। नतीजा यह हुआ कि चोरों ने रात के अंधेरे में कार के चारों चक्के और अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया।

मामला 2: तारादेही थाना क्षेत्र के समनापुर के पास करीब एक महीने पहले मक्का का भूसा ले जा रहे एक ट्रक में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। घटना के बाद से यह ट्रक आज भी उसी जगह खड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि घना कोहरा होने के कारण यह ट्रक दूर से दिखाई नहीं देता, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने कई बार पुलिस को इसे हटवाने की सूचना दी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। नियमानुसार पुलिस को क्रेन की मदद से इसे हटवाकर थाने में खड़ा करना था, लेकिन अनदेखी के कारण हादसे का अंदेशा बना हुआ है।

पुलिस के लिए तय होती है जिम्मेदारी
जानकारों के अनुसार, किसी भी दुर्घटना के बाद घटनास्थल की सुरक्षा और वहां मौजूद संपत्ति की रक्षा करना पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य है।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106 पुलिस को अधिकार और जिम्मेदारी देती है कि वे अपराध या दुर्घटना से जुड़ी किसी भी संपत्ति को जब्त करें या अपनी अभिरक्षा में लें, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो। इसके अलावा पुलिस नियमों के अनुसार, सड़क पर लावारिस या दुर्घटनाग्रस्त पाए गए वाहनों को पुलिस को अनक्लेम्ड प्रॉपर्टी के रूप में अपनी सुरक्षित अभिरक्षा में लेना चाहिए जब तक कि उनका कानूनी निस्तारण न हो जाए। इसके अलावा माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि पुलिस को जप्त या दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को खुले में नहीं छोड़ना चाहिए। उन्हें सुरक्षित रखना पुलिस की जिम्मेदारी है ताकि वाहन के कीमती पार्ट्स चोरी न हों और वाहन कबाड़ न बने।

इनका कहना है
यह गंभीर मामला है। यदि घटनास्थल पर वाहन खड़ा है और उससे सामग्री चोरी हो रही है, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। नियमानुसार पुलिस को दुर्घटनाग्रस्त वाहन अपनी अभिरक्षा में लेना चाहिए। मैं संबंधित थाना प्रभारियों से बात कर जांच के निर्देश देता हूं।
सुजीत कुमार भदौरिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

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