Monday, November 2, 2026
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दिग्विजय सिंह की ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का ऐलान… 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

‘शिवधाम से रामधाम’ तक की यात्रा

भोपाल/उज्जैन/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करने की औपचारिक घोषणा कर दी है। उन्होंने इस यात्रा को ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ नाम दिया है। यात्रा की शुरुआत 20 अक्टूबर से उज्जैन स्थित भगवान महाकाल के दरबार से होगी और इसका समापन अयोध्या में भगवान रामलला के दर्शन के साथ प्रस्तावित है। दिग्विजय सिंह की यह पदयात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और वैचारिक संदेश से भी जुड़ी मानी जा रही है। यात्रा को ‘शिवधाम से रामधाम’ तक की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यानी उज्जैन के महाकाल मंदिर से शुरू होकर यह यात्रा अयोध्या स्थित रामलला मंदिर तक पहुंचेगी।

महाकाल से रामलला तक होगी यात्रा
दिग्विजय सिंह के अनुसार, यात्रा का प्रारंभ उज्जैन के महाकाल मंदिर से किया जाएगा। उज्जैन को भगवान महाकाल की नगरी और अयोध्या को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में देखते हुए यात्रा की रूपरेखा तैयार की गई है। इसी वजह से इसे ‘शिवधाम से रामधाम’ तक की यात्रा कहा जा रहा है। यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए लोगों से संवाद भी कर सकते हैं। हालांकि यात्रा का विस्तृत रूट, प्रतिदिन की दूरी, पड़ाव और कार्यक्रम की पूरी जानकारी आने वाले दिनों में सामने आने की संभावना है।

20 अक्टूबर से शुरू होगी ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’
पूर्व मुख्यमंत्री ने यात्रा की तारीख 20 अक्टूबर 2026 तय की है। यात्रा को लेकर समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी उत्साह देखा जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा में लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए एक गूगल फॉर्म भी जारी किया है, जिसके माध्यम से इच्छुक लोग यात्रा से जुड़ने के लिए अपनी जानकारी दे सकते हैं। यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। दिग्विजय सिंह लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। ऐसे में उज्जैन से अयोध्या तक की यह पदयात्रा मध्यप्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकती है।

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राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
दिग्विजय सिंह की ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब मध्यप्रदेश में राजनीतिक तौर पर धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे लगातार चर्चा के केंद्र में हैं। कांग्रेस नेता की ओर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या के रामलला मंदिर तक पदयात्रा का ऐलान किए जाने के बाद इसके राजनीतिक संदेश को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह की ओर से यात्रा को किस व्यापक उद्देश्य और संदेश के साथ आयोजित किया जा रहा है, इसे लेकर आगे और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल उन्होंने इसे ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ नाम देते हुए धार्मिक आस्था और सनातन परंपरा से जोड़कर पेश किया है।

यात्रा में लोगों से जुड़ने की अपील
यात्रा में शामिल होने के इच्छुक लोगों के लिए दिग्विजय सिंह की ओर से गूगल फॉर्म जारी किया गया है। इसके जरिए यात्रा में सहभागिता करने वाले लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि यात्रा को केवल व्यक्तिगत पदयात्रा के बजाय व्यापक जनसहभागिता वाला कार्यक्रम बनाने की तैयारी है। उज्जैन से अयोध्या के बीच प्रस्तावित यह यात्रा लंबी दूरी की पदयात्रा होगी। ऐसे में रास्ते में विभिन्न शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से संवाद, स्थानीय कार्यकर्ताओं की सहभागिता और धार्मिक स्थलों पर कार्यक्रमों को लेकर भी तैयारियां की जा सकती हैं।

कांग्रेस की राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है यात्रा
दिग्विजय सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और मध्यप्रदेश की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में उनकी ओर से की जा रही इस यात्रा पर राजनीतिक नजरें भी रहेंगी। यात्रा के दौरान वे किन मुद्दों को उठाते हैं और लोगों के बीच क्या संदेश देते हैं, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से शुरू होकर अयोध्या के रामलला मंदिर तक जाने वाली ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ की घोषणा ने मध्यप्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम क्या रहता है और इसमें कितनी जनभागीदारी होती है।

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