भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में हाल में सागर का शराब कांड सुर्खियों में हैं, इसके मुख्य आरोपी के रुप में चंदू राजा ततरवारा का नाम सुर्खियों में आ रहा है, जिनको फोटो मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के साथ साझा किए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर राजपूत के साथ चंदू राजा के फोटो साझा किए, हालांकि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उनसे किसी भी आरोपी के संबंध की बात को नकार दिया है। दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की किरकिरी साबित हो रहा है, जिसको संभालने के मामले में वो हल्के पड़ते दिखाई दे रहे हैं, तीसरे मंत्री लखन पटेल हैं, जोकि बीजेपी के आला नेताओं से मिलकर अपनी बात रखते हुए, नजर आ रहे हैं, माजरा आप समझ ही गए होंगे।

तीनों मंत्रियों की कार्यशैली पर सवाल
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत मूलत: ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक माने जाते हैं, जोकि सागर जिले से एकमात्र मंत्री है, जबकि वहां पर पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह मंत्री पद से वंचित रह चुके हैं। इस स्थिति में राजपूत पर सवाल उठना क्षेत्रीय राजनीति के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकता है। इसी तरह स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की नाक के नीचे इंटर्न डॉक्टर्स की नाराजगी उनकी कार्यक्षमता पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है, जिसका खामियाजा बीजेपी को कभी भी उठाना पड़ सकता है, क्योंकि जेन-जी पहले ही बीजेपी से नाराज बताया जा रहा है। कुछ ऐसे ही मंत्री लखन पटेल से कई विभाग वापस लेने के बाद अब वो बड़े नेताओं के साथ देखे गए, जिसके पीछे उनकी नाराजगी साफ झलकती नजर आ रही है।

अब क्या होगा?
मध्यप्रदेश में काफी वक्त से मोहन मंत्रिमंडल के विस्तार की बात कही जा रही है, इसके बावजूद अब तक शुरुआती मंत्रिमंडल ही काम कर रहा है। वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी पहले ही उभरकर सामने आ रही है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कई बार मंत्रिमंडल की बैठक तक में शामिल नहीं हुए हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए जल्द ही प्रदेश में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। जिस तरह से राहुल गांधी की सभा को समर्थन मिल रहा है, उसके लिए पार्टी आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए बड़ा कदम उठा सकती है। जिसमें सबसे पहला मंत्रिमंडल विस्तार और खाली पड़े पदों पर नियुक्ति के साथ-साथ खराब परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों की रवानगी शामिल है।

वरिष्ठों के लिए कुछ अलग करना होगा?
बीजेपी ने पिछला चुनाव जीतने के लिए राष्ट्रीय राजनीति से प्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, राव उदयप्रताप सिंह को भेज दिया था। सभी अपनी-अपनी विधानसभा सीटों पर चुनाव जीतकर भी आ गए, हालांकि उसके बाद उन्हें मन मुताबिक विभाग नहीं मिलने के चलते, सभी की कुंठा सामने आ रही है। एक ओर दतिया उपचुनाव में टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा को भी साधना पार्टी के लिए चुनौती साबित हो रहा है। जिस पर अब बीजेपी कोई बड़ा एक्शन प्लान बनाकर काम करती नजर आ सकती है।
संघ से लिए जा सकते हैं प्रचारक
बीजेपी में संगठन की दुरुस्ती के लिए एक बार फिर बीजेपी अपना ट्रंप कार्ड खेल सकती है, पार्टी सूत्रों की माने तो प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की विदाई के बाद से पार्टी में अंदरुनी खींचतान अधिक तेज हो गई है। लिहाजा अब एक बार फिर बीजेपी संघ का दरवाजा खटखटा सकती है, और जल्द ही प्रदेश संगठन महामंत्री के रुप में कोई खांटी प्रचारक बीजेपी की कमान संभाल सकता है, ताकि उनके सामने सभी नेताओं को एक जाजम पर लाकर आगे के चुनावों में एक बेहतर परिणाम की तरफ आगे बढ़ा जा सके।
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