डिंडोरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/ केंद्र सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी जनमन आवास योजना का उद्देश्य बैगा, भारिया और सहरिया जैसे समुदायों को पक्का, सुरक्षित और गरिमापूर्ण आवास उपलब्ध कराना है, ताकि वर्षों से चली आ रही आवासीय असुरक्षा को समाप्त किया जा सके। लेकिन अमरपुर जनपद क्षेत्र में इस योजना की जमीनी हकीकत सरकार की मंशा से कोसों दूर दिखाई दे रही है। अमरपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत अलौनी, वार्ड क्रमांक 03 में रहने वाले बैगा समुदाय के पात्र हितग्राही सुखसेन का मामला योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सुखसेन के अनुसार वर्ष 2024 में उसे जनमन आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुआ था। पहली किस्त मिलने पर उसने घर का प्लिंथ (नींव) स्तर तक निर्माण कराया, लेकिन इसके बाद पिछले दो वर्षों से काम वहीं ठप पड़ा है।
ईंट की कमी या सिस्टम की लापरवाही?
सुखसेन का कहना है कि डोर लेवल तक निर्माण कराने के लिए उसे ईंट नहीं मिल पा रही है। न तो सामग्री उपलब्ध कराई गई और न ही संबंधित विभागीय अधिकारियों ने समय-समय पर निरीक्षण कर समस्या का समाधान किया। परिणामस्वरूप आवास अधूरा पड़ा है और योजना का लाभ कागज़ों में सिमट कर रह गया है।
झोपड़ी में गुजर रहा परिवार का जीवन
अधूरा मकान होने के कारण सुखसेन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बीते पांच वर्षों से झोपड़ी में रहने को मजबूर है। कड़ाके की ठंड में बच्चों के साथ रात काटना मुश्किल हो जाता है, वहीं बारिश के मौसम में झोपड़ी चारों ओर से टपकती है। ऐसे हालात में परिवार का जीवन हर मौसम में संघर्ष बन गया है।
मेहनत-मजदूरी से चलता है घर
सुखसेन परिवार का भरण-पोषण मेहनत-मजदूरी और लकड़ी बेचकर करता है। सीमित आय में बच्चों की परवरिश, भोजन और अधूरे मकान की चिंता उसके लिए रोज़ की जद्दोजहद बन चुकी है।
योजना का उद्देश्य और जमीनी सच्चाई
जानकारों के अनुसार, जनमन योजना के तहत सरकार का लक्ष्य 2026 तक लाखों पीवीटीजी परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत घर निर्माण की राशि सीधे हितग्राहियों के आधार से जुड़े खातों में भेजी जाती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और गरीब परिवारों को शौचालय, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से युक्त घर मिल सके।
लेकिन अमरपुर क्षेत्र में हितग्राहियों और विभागीय स्तर की लापरवाही के कारण यह लक्ष्य अब भी अधूरा नजर आ रहा है।
जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
मामले को लेकर जब ब्लॉक स्तर पर संपर्क किया गया, तो स्पष्ट और ठोस जवाब सामने नहीं आ सका। जनपद पंचायत अमरपुर के सीईओ द्वारा जानकारी दिखवाकर बताने की बात कही गई, लेकिन ज़मीनी हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल
जब योजना का मकसद सबसे कमजोर तबके को गरिमापूर्ण जीवन देना है, तो फिर समय पर निरीक्षण, सामग्री की उपलब्धता और निर्माण पूर्ण कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
अगर ऐसे मामलों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो जनमन आवास योजना का सपना ज़रूरतमंदों के लिए सपना ही बनकर रह जाएगा।


