डिंडोरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/ ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ करने के सरकारी दावों की हकीकत शहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में साफ दिखाई दे रही है। यहां किडनी रोगियों के लिए स्थापित डायलिसिस मशीन पिछले दो वर्षों से केवल शोपीस बनकर रह गई है। प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति न होने के कारण यह जीवनरक्षक मशीन आज तक मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सकी, जिससे क्षेत्र में गंभीर असंतोष व्याप्त है।
लाखों रुपये किए गए थे खर्च
सूत्रों के अनुसार, शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च कर शहपुरा अस्पताल में डायलिसिस मशीन स्थापित की गई थी। उद्देश्य था कि किडनी रोग से पीड़ित गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को जिला मुख्यालय या निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से राहत मिले। लेकिन मशीन स्थापना के बाद से अब तक इसके संचालन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप मरीजों को या तो डिंडोरी जिला अस्पताल जाना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों में भारी खर्च वहन करना पड़ रहा है।
मरीज की जान के लिए खतरा
स्थानीय मरीजों का कहना है कि डायलिसिस नियमित और समयबद्ध प्रक्रिया है। देरी या अनियमितता मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे में नजदीकी सरकारी अस्पताल में सुविधा होते हुए भी उसका उपयोग न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और भी पीड़ादायक बन गई है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सुस्ती
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दो वर्षों से मशीन बंद रहने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई। न तो ऑपरेटर की नियुक्ति की गई और न ही अस्थायी वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता दिखाई गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीजों के परिजनों ने की मांग
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि शीघ्र ही डायलिसिस मशीन को चालू कर प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति की जाए। साथ ही मशीन की नियमित जांच और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।
स्वास्थ्य विभाग पर नजर
यदि समय रहते यह सुविधा शुरू की जाती है, तो शहपुरा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर मौन साधे रहते हैं, या फिर जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाकर मरीजों को वास्तविक लाभ पहुंचाते हैं।


