डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ डिंडौरी वन परिक्षेत्र के जंगलों में पिछले एक महीने से बाघ की आवाजाही ने ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना दिया है। वन विभाग के अनुसार, कैमरा ट्रैप में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। लगातार उसके मूवमेंट के कारण ग्रामीण अब जंगल में लकड़ी या चारा लेने तक जाने से डर रहे हैं। बताया गया है कि बाघ की गतिविधियां गोपालपुर, गोरखपुर, रामहेपुर, रानीबुढार, नेवसा, बिझौरा, भरवई, और देवकरा क्षेत्र में देखी जा रही हैं। क्षेत्र में कई पशुओं के शिकार के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। रेंजर अनुपम सिंह के नेतृत्व में छह निगरानी दल गठित किए गए हैं, जो चौबीसों घंटे जंगल के अलग-अलग हिस्सों में तैनात हैं।
बाघ की लोकेशन पर रख रहे नजर
वन अमले ने कैमरा ट्रैप के माध्यम से बाघ की लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखी हुई है। रेंजर अनुपम सिंह ने बताया कि “टीम को सतर्क रहने और ग्रामीणों को जंगल में अकेले न जाने की सलाह दी गई है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में वनकर्मियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई है।” इसके बाद वन विभाग ने पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर ग्रामीणों को सतर्क किया। देर रात और सुबह के समय ग्रामीणों को खेत या जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी गई है।
ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय
वन विभाग के अनुसार, क्षेत्र में ट्रैप कैमरा लगाए गए हैं और गश्ती दल नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि अब तक बाघ ने किसी व्यक्ति पर हमला नहीं किया है, लेकिन उसकी लगातार उपस्थिति ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। रेंजर अतुल सिंह ने संभावना जताई है की बाघिन बांधवगढ़ नेशनल टाइगर रिजर्व से डिंडोरी के जंगलों में आई है, वन विभाग की टीम उसकी हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही किसी शिकार की जानकारी मिलती है टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर, सर्वे पंचनामा और मुआवजे की कार्यवाही करती है।
शिकारियों पर भी वन विभाग की नजर
शिकारी पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है रेंजर डिंडोरी ने बताया की महीने भर से बाघ ने शाहपुर और डिंडोरी वन परिक्षेत्र के बीच 50 किलोमीटर की टेरिटरी बना ली है। जहां घूम-घूम कर बाघ शिकार कर रहा है। जिसमें शाहपुर मुड़की और हिनौता के आसपास के क्षेत्र भी शामिल है, जहां इंसानी बसाहट नजदीक ही है ऐसी स्थिति में बाघ की सुरक्षा और जान माल की रक्षा वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है। जिसके मद्देनजर बन अमला संजीदगी बरतते हुए ग्रामीणों को सतर्कता बरतने में और जंगल की ओर मवेशियों और इंसानों को जाने से रोकने में लगा हुआ है। वन अमला उम्मीद जता रहा है कि बाघ जल्द ही जंगल के गहराई वाले हिस्से की ओर लौट जाएगा। तब तक विभाग की टीमें चौकसी में जुटी हुई हैं ताकि किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके।


