Monday, November 2, 2026
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MP Anganwadi Worker: MP की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को खुशखबरी, मिलेगा एरियर्स मिलेगा

MP Anganwadi Worker: मध्य प्रदेश की लगभग 96 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हक में देश की न्यायपालिका से एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए आंगनवाड़ी कर्मचारियों का लंबे समय से रुका हुआ बकाया एरियर्स और ग्रेच्युटी का लाभ जल्द से जल्द भुगतान करने का आदेश जारी किया है। अदालत के इस फैसले से जहां हजारों महिला कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ ब्याज की शर्त हटने से राज्य सरकार के खजाने को भी बड़ी राहत मिली है।

1400 करोड़ के एरियर्स पर मुहर

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की संयुक्त खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच के पिछले आदेश को कुछ संशोधनों के साथ बरकरार रखा है। राज्य सरकार को जून 2019 से जून 2023 तक का बकाया 1400 करोड़ रुपये का एरियर्स और ग्रेच्युटी देना होगा। इससे पहले सिंगल बेंच ने बकाया राशि पर सालाना 6% ब्याज देने का आदेश दिया था। हालांकि, डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि मूल याचिका में ब्याज की मांग का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था। ऐसे में 6 फीसदी ब्याज देने की शर्त को खारिज कर दिया गया, जिससे मध्य प्रदेश सरकार को करीब 300 करोड़ रुपये कम चुकाने होंगे।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान माननीय अदालत ने राज्य सरकार के एक पुराने फैसले पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार अपना पुराना अंशदान पहले की तरह ही बनाए रखे। खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब साल 2018 में केंद्र सरकार ने आंगनवाड़ी कर्मचारियों का अंशदान बढ़ाया था, तो ठीक उसके बाद राज्य सरकार ने अपना हिस्सा क्यों कम कर दिया? इस कटौती की वजह से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलने वाला वास्तविक वित्तीय लाभ काफी कम हो गया था, जो कि अनुचित था।

क्या है पूरा विवाद?

दरसअल, इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2018 और उसके बाद हुए सत्ता परिवर्तन से जुड़ी हुई हैं। केंद्र सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद कार्यकर्ताओं का कुल मानदेय बढ़कर 10,000 रुपये और सहायिकाओं का 7,000 रुपये प्रति माह हो गया था। साल 2019 में मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने राज्य सरकार के हिस्से का अंशदान घटा दिया। इस कटौती के कारण कार्यकर्ताओं का मानदेय घटकर महज 5,500 रुपये तक सीमित हो गया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ आंगनवाड़ी कर्मचारी संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब कार्यकर्ताओं की जीत हुई है।

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