MP Rajyasabha Election: मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नाम की चर्चा जोरों पर है। मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर पहुंचे और बंद कमरे में हुई लंबी चर्चा ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है। चर्चा है कि भाजपा हाईकमान नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजकर उन्हें फिर से मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय करने का मन बना रहा है।
गणित और नरोत्तम का ‘दांव’
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने हैं। वर्तमान में इनमें से दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। दिग्विजय सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वे अब चुनाव नहीं लड़ेंगे। नरोत्तम मिश्रा को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बेहद खास माना जाता है। सूत्रों की मानें तो नरोत्तम ने खुद कांग्रेस वाली सीट पर भाजपा की ओर से चुनौती पेश करने की इच्छा जताई है। यदि भाजपा नेतृत्व ने उन्हें ‘फ्री हैंड’ दिया, तो दिग्विजय सिंह की खाली हो रही सीट पर भी कमल खिल सकता है।
नरोत्तम को ‘इनाम’ की उम्मीद?
दरअसल, बीते विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने संगठन के लिए ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाई है। 2023 विधानसभा और हालिया लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के छोटे-बड़े हजारों नेताओं को भाजपा में शामिल कराने का श्रेय नरोत्तम मिश्रा को जाता है। भले ही वे 2023 का चुनाव हार गए हों, लेकिन ग्वालियर-चंबल और प्रदेश की राजनीति में उनका दखल कम नहीं हुआ है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि 2028 के अगले विधानसभा चुनाव से पहले नरोत्तम मिश्रा जैसे कद्दावर नेता को संवैधानिक पद देकर एक्टिव रखा जाए।
बंद कमरे की चर्चा के मायने
हेमंत खंडेलवाल और नरोत्तम मिश्रा के बीच हुई इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसमें आगामी राज्यसभा चुनाव और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मोदी की भाजपा में नरोत्तम मिश्रा की दिल्ली रवानगी अब महज एक घोषणा की दूरी पर लग रही है।


