भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की संघ में वापसी ने सियासी हलचल मचा दिए है, अब वे संघ के मध्य क्षेत्र के सह बौद्धिक प्रमुख की भूमिका निभाएंगे। उनके कार्यकाल में बीजेपी ने विधानसभा और लोकसभा में बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन फिर भी है हितानंद शर्मा को हटाया जाना चर्चाओं का विषय बना हुआ है, जिसको लेकर दबी जुबान में जानकार अलग अलग तर्क दे रहे है, जिसको आज हम आपसे साझा करने वाले हैं।
क्या पूरी तरह बीजेपी में आना चाह रहे थे हितानंद ?
मार्च 2022 से प्रदेश संगठन महामंत्री के तौर पर सक्रिय रहे हितानन्द शर्मा ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, शर्मा के कार्यकाल में भाजपा ने 2023 विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज की और 2024 लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटों पर विजय हासिल की. ऐसे समय में उनकी संघ में वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं, जिसमें एक कारण बताया जा रहा है कि वो पूरी तरह बीजेपी में जाने के इच्छुक थे, लेकिन संघ ने नई परंपरा शुरू करने की बजाय उन्हें वापस संघ में बुला लिया।
हेमंत खंडेलवाल को नया संगठन महामंत्री देकर काम करने का मौका
पूर्व संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा अपने पूरे कार्यकाल में अधिकतर वीडी शर्मा के साथ काम करते नजर आए, इस दौरान दोनों शर्मा की जोड़ी ने बीजेपी कार्यालय को एक पॉवर सेंटर के रूप में स्थापित किया। संगठन के नेताओं को इतना मजबूत किया कि जिला स्तर पर उनकी जनता के चुने नेताओं के बराबर चलने लगी, हालांकि उन्होंने नियुक्तियां भी अपने मन मुताबिक ही की, और तो और अपने प्रिय नेताओं को टिकट दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, किसका उदाहरण है कि पिछली प्रदेश कार्यकारिणी में से अधिकतर विधायक या सांसद है, ऐसे में एमपी बीजेपी में पॉवर का समन्वित करने के लिए भी हितानंद शर्मा की संघ में वापसी को कारण बताया जा रहा है, और हेमंत खंडेलवाल को नया संगठन महामंत्री देकर काम करने की भी बात कही जा रही है।
नियुक्तियों और पोस्टिंग को भी बताया जा रहा कारण
हितानन्द शर्मा की संघ में वापसी के पीछे बीजेपी में हाल ही में हुई कई नियुक्तियों को भी कारण बताया जा रहा है, क्योंकि ये सीधे स्थानीय नेताओं से बिना समन्वय स्थापित की गई, जिससे स्थानीय नेताओं में नाराजगी थी, वो लगातार संघ के आला पदाधिकारियों तक अपनी बात रख रहे थे। इसी तरह अधिकारियों की पोस्टिंग में भी बीजेपी दफ्तर से सीधा हस्तक्षेप करने की बात सामने आई है, खासतौर पर नर्मदापुरम की एक महिला अधिकारी की पोस्टिंग और संरक्षण में हीतानन्द शर्मा की भूमिका की चर्चा सियासी गलियारों में थी। इसको भी नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति का कारण बताया जा रहा है, वहीं नेताओं की गलत बयानी और लगातार शिष्टाचार का घटता ग्राफ भी शर्मा का पद जाने का कारण गिनाया जा रहा है।
कौन बनेगा अगला बीजेपी प्रदेश संगठन महामंत्री
बीजेपी में प्रदेश संगठन महामंत्री का पद बेहद ही महत्वपूर्ण होता है, जो कि बीजेपी और संघ के बीच एक कड़ी का काम करता है, ऐसे में हितानन्द शर्मा के पद से हटने के बाद जल्द इसको भर दिया जाएगा। फिलहाल आ रही मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नए संगठन महामंत्री के रूप में जिन नामों की चर्चा है, उनमें सबसे ऊपर मध्य भारत प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता का नाम शामिल है, जिसके पीछे उनकी संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले से नजदीकी को कारण बताया जा रहा है। हालांकि इसके साथ साथ मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह को भी मजबूत बताया जा रहा है, जोकि पूर्व संगठन महामंत्री सुहास भगत के करीबी हैं। इसी तरह विद्या भारती के प्रांत संगठन महामंत्री निखिलेश माहेश्वरी समेत अनिल अग्रवाल, बिहार के संगठन महामंत्री भीखू भाई की भी MP बीजेपी में आमद का दावा किया जा रहा, साथ ही विद्यार्थी परिषद से भी नाम सामने आ रहे हैं, जिस पर से जल्द पर्दा उठ जाएगा।


