कटनी – 🖊️ ( सौरभ श्रीवास्तव ) लंबे इंतज़ार के बाद जिले को मेडिकल कॉलेज का तमगा तो मिल गया, लेकिन यह मेडिकल कॉलेज सरकारी नहीं बल्कि प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर स्थापित हुआ है। गुरुवार को पत्रकार वार्ता में विधायक संदीप जायसवाल ने इसे बड़ी उपलब्धि करार दिया, लेकिन दिलचस्प यह रहा कि उन्होंने जिन बातों को सफलता की तरह गिनाया, वही आने वाले समय में जनता के लिए सिरदर्द साबित हो सकती हैं।कटनी के लोग वर्षों से शासकीय मेडिकल कॉलेज की माँग कर रहे थे। जिले की आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं को देखते हुए यहाँ सरकारी मेडिकल कॉलेज की ज़रूरत थी, ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके। लेकिन अब जो मेडिकल कॉलेज मंजूर हुआ है, वह प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित है।पत्रकार वार्ता में विधायक संदीप जायसवाल ने कहा कि यह जिले की बड़ी उपलब्धि है कि यहाँ मेडिकल कॉलेज की शुरुआत हो रही है। उन्होंने माना कि मॉडल शत-प्रतिशत परफेक्ट नहीं है, फिर भी उन्होंने इसे “कटनी की जीत” बताकर पेश किया।लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कॉलेज वाकई जिले की जनता के लिए मददगार साबित होगा?प्राइवेट मॉडल होने के कारण फीस और इलाज की लागत अधिक रहने की संभावना है।गरीब और ग्रामीण इलाकों के मरीज महंगे इलाज का खर्च कैसे उठा पाएंगे?डॉक्टरों और स्टाफ की नियुक्ति पर भी निजी संस्था का नियंत्रण होगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे।जनता की नाराज़गीजिले की जनता का मानना है कि “अपाहिज ही सही, बेटा तो मिला” वाली सोच से काम नहीं चलेगा। मेडिकल कॉलेज का टैग मिलने से कटनी का नाम तो जुड़ जाएगा, लेकिन अगर यहाँ इलाज महँगा और मरीजों की पहुँच से बाहर होगा तो यह महज़ दिखावा ही साबित होगा।कटनी समेत महाकौशल क्षेत्र लंबे समय से मेडिकल कॉलेज की कमी झेल रहा है। जबलपुर और रीवा जैसे शहरों में भीड़ के कारण यहाँ के मरीजों को बार-बार परेशान होना पड़ता है। ऐसे में जिले को एक पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज की दरकार थी।निष्कर्ष:अब देखने वाली बात यह होगी कि यह मेडिकल कॉलेज कटनी के लिए वरदान साबित होता है या फिर जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला एक और प्रोजेक्ट बनकर रह जाएगा।
कटनी को मिला मेडिकल कॉलेज, पर सवालों के घेरे में मॉडल विधायक जी ने खामियों को ही बता दिया उपलब्धि
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