धर्मराज सिंह/ खबर डिजिटल/राजगढ़। जिले के ऐतिहासिक नगर खिलचीपुर में आज आस्था और परंपराओं की रक्षा के लिए एक अभूतपूर्व जनआंदोलन देखने को मिला। वर्षों पुरानी मेला भूमि पर हो रहे कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण के विरोध में सकल हिंदू समाज के आह्वान पर पूरा नगर स्वतः स्फूर्त बंद रहा। व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखकर इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया, जिससे नगर में सन्नाटा पसरा रहा लेकिन लोगों के दिलों में आक्रोश की लहर साफ देखी गई।
पैदल रैली और कलेक्ट्रेट का घेराव
आंदोलन की शुरुआत खिलचीपुर से हुई, जहां से सैकड़ों की संख्या में नागरिक, युवा और बुजुर्ग राजगढ़ के लिए पैदल रवाना हुए। हाथों में तख्तियां और नारों की गूंज के साथ यह विशाल रैली जिला मुख्यालय पहुंची। कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन की उग्रता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कलेक्ट्रेट गेट पर भारी घेराबंदी की और प्रदर्शनकारियों को भीतर जाने से रोक दिया।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और ज्ञापन
प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े थे कि वे जिला कलेक्टर से ही बात करेंगे। काफी देर तक चले हंगामे के बाद, एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। समाज के प्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के चलते ऐतिहासिक मेला मैदान की बेशकीमती जमीन को खुर्द-बुर्द किया जा रहा है और वहां अवैध कब्जे कराए जा रहे हैं।
कलेक्टर का आश्वासन और कार्य पर रोक
मामले की गंभीरता और बढ़ते दबाव को देखते हुए जिला कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। कलेक्टर ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि मेला भूमि का विधिवत सीमांकन किया जाएगा और किसी भी प्रकार का स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वर्तमान में चल रहे जनपद पंचायत भवन के निर्माण कार्य को भी आगामी आदेश तक रोकने के निर्देश दे दिए हैं।
इस घटनाक्रम ने प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया है। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन वास्तव में इस ऐतिहासिक विरासत को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त करा पाता है या यह आश्वासन मात्र औपचारिकता बनकर रह जाएगा।


