सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी–बरगवां क्षेत्र की लाल पहाड़ी… जो कभी सरकारी दस्तावेजों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी, आज सवालों के घेरे में है। सूत्रों के मुताबिक, करोड़ों–अरबों रुपए की इस बेशकीमती जमीन पर रसूखदारों का कब्ज़ा कैसे हो गया? यह सिर्फ एक सवाल नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर उठता बड़ा आरोप है।बताया जा रहा है कि जिले में पूर्व में पदस्थ रहे कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और भू-माफियाओं की कथित मिलीभगत से यह बड़ा खेल खेला गया। नतीजा—जो जमीन जनता की थी, वह चुपचाप प्रभावशाली लोगों के नाम दर्ज हो गई। और आज उसी जमीन पर चार-चार मंजिला इमारतें तान दी गई हैं।सबसे बड़ा सवाल—जब यह सब हो रहा था, तब प्रशासन कहां था?क्या उन्हें यह सब दिखाई नहीं दिया या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं?यदि पुराने दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो यह साफ हो सकता है कि कितनी जमीन पर अवैध कब्जा है। और अगर सच्चाई सामने आई, तो कई आलीशान इमारतों पर बुलडोजर चलने की नौबत आ सकती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कार्रवाई की उम्मीद बेहद कम नजर आती है।आज हालात यह हैं कि लाल पहाड़ी की आधे से ज्यादा जमीन पर रसूखदारों ने कब्जा जमा लिया है और प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा है।ना कोई सख्ती, ना कोई जांच, ना कोई जवाबदेही।अगर यही स्थिति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब “लाल पहाड़ी” नाम की शासकीय भूमि सिर्फ कागजों में रह जाएगी और जमीन पर उसका अस्तित्व पूरी तरह मिट जाएगा।अब सवाल जनता का है—क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
लाल पहाड़ी पर कब्ज़े का खेल: अरबों की शासकीय ज़मीन पर रसूखदारों का राज, प्रशासन मौन!
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