Monday, November 2, 2026
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अंधेरी रात में रेत का खेल, सुबह होते ही ‘कानूनी’ कारोबार!घाटों से आधी रात रेत उठने का आरोप, दिनभर डंप रेत की सप्लाई—एक टीपी के सहारे कई फेरों का खेल?

खबर डिजिटल न्यूज़ कटनी— बरही क्षेत्र में रेत के कथित अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि दिन में शांत नजर आने वाले नदी घाट रात होते ही रेत परिवहन के लिए सक्रिय हो जाते हैं। आधी रात के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत निकालकर पहले सुरक्षित ठिकानों पर डंप की जाती है और फिर दिन निकलते ही इसी रेत को अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई किए जाने का कथित खेल चलता है।अमरपुर चौकी क्षेत्र के सिद्ध महाराज घाट (मुरुगुड़ी), जाजागढ़, बिचपुरा और कनौर क्षेत्र को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि रात के सन्नाटे में नदी क्षेत्र से रेत निकालने के बाद इसे बरही एवं आसपास के इलाकों में डंप कर दिया जाता है।टीपी कहीं की, रेत कहीं की?इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल ट्रांजिट पास यानी टीपी को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि उमरिया जिले के बढ़छड़ क्षेत्र से कटनी या मैहर को गंतव्य दर्शाकर टीपी जारी कराई जाती है, जबकि वास्तविकता में स्थानीय स्तर पर पहले से डंप की गई रेत की सप्लाई की जाती है।यदि ऐसा हो रहा है तो यह जांच का विषय है कि टीपी में दर्ज रेत और मौके पर परिवहन की जा रही रेत का आपस में कितना संबंध है। क्या संबंधित विभाग वाहनों की आवाजाही, टीपी, ई-रवन्ना और वास्तविक डिलीवरी का मिलान कर रहा है?एक पर्ची पर बार-बार फेरों का आरोपस्थानीय सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर एक ही टीपी की आड़ में अलग-अलग वाहनों से रेत परिवहन किए जाने की शिकायतें हैं। यदि यह आरोप सही है तो एक वैध दस्तावेज का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा से अधिक रेत के परिवहन के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।ऐसे में सवाल उठता है कि टीपी की जांच केवल कागज देखकर हो रही है या वाहन, मात्रा और वास्तविक गंतव्य का भी सत्यापन किया जा रहा है?कटनी-उमरिया सीमा बनी चुनौतीकटनी और उमरिया जिले की सीमा से लगे होने के कारण यह पूरा क्षेत्र प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। आरोप है कि निगरानी या कार्रवाई की भनक लगते ही वाहन सीमा बदल लेते हैं। इससे दोनों जिलों की सीमा पर प्रभावी निगरानी और संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता और बढ़ जाती है।घाट से डंपिंग स्थल तक हो जांच तो खुलेगा पूरा राजमामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए केवल सड़क पर वाहनों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। रात के समय नदी घाटों की निगरानी, डंपिंग स्थलों की जांच, टीपी रिकॉर्ड, वाहन नंबर, ई-रवन्ना और रेत की मात्रा का मिलान किए जाने की जरूरत है।सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर रात में घाटों से रेत नहीं निकाली जा रही, तो आधी रात के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कहां से और किसकी रेत लेकर निकलती हैं?अब देखना यह है कि इन आरोपों और शिकायतों पर खनिज विभाग एवं प्रशासन कब जांच शुरू करता है और कथित रेत कारोबार की असली तस्वीर कब सामने आती है।

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