उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है. चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन BJP समेत तमाम राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. सत्तारूढ़ BJP अपने सहयोगी दलों के साथ रणनीति बनाने में लगी है, वहीं समाजवादी पार्टी भी चुनावी मैदान के लिए कमर कस रही है. इसी बीच एक सर्वे में यूपी की जनता के मूड को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.
Vote Vibe के State Vibe Survey में लोगों से पूछा गया कि वे 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद किस नेता को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं. सर्वे के नतीजों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे आगे नजर आए.
योगी आदित्यनाथ पहली पसंद
सर्वे के मुताबिक, करीब 43.4 फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ को अगली बार भी मुख्यमंत्री के रूप में देखने की इच्छा जताई. इन लोगों का कहना है कि उन्हें योगी सरकार का काम पसंद है और वे उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालते देखना चाहते हैं.
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को 35.5 फीसदी लोगों का समर्थन मिला. यानी मुख्यमंत्री की पसंद के मामले में योगी और अखिलेश के बीच मुकाबला काफी अहम नजर आ रहा है.
मायावती को करीब 5.9 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया, जबकि 3 फीसदी लोगों ने प्रियंका गांधी को मुख्यमंत्री पद के लिए बेहतर विकल्प माना. करीब 6 फीसदी लोगों ने दिए गए विकल्पों में से किसी को भी पसंद नहीं किया. वहीं, 6.3 फीसदी लोगों ने फिलहाल अपनी राय जाहिर करने में असमर्थता जताई.
NDA और INDIA Alliance में भी कांटे की टक्कर
सर्वे में लोगों से यह भी सवाल किया गया कि अगर अभी विधानसभा चुनाव हों तो वे किस पार्टी या गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगे. इस सवाल के जवाब में BJP के नेतृत्व वाले NDA को मामूली बढ़त मिली.
आंकड़ों के अनुसार, 41.8 फीसदी लोगों ने NDA के पक्ष में भरोसा जताया. वहीं, 38.7 फीसदी लोगों ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के INDIA Alliance को अपनी पसंद बताया.
इसके अलावा 5.2 फीसदी लोगों ने मायावती की BSP का समर्थन किया. करीब 4 फीसदी लोगों ने अन्य दलों को चुनने की बात कही, जबकि लगभग 10 फीसदी लोग ऐसे रहे जिन्होंने कहा कि वे अभी कुछ तय नहीं कर सकते.
चुनाव से पहले क्या संकेत दे रहे हैं आंकड़े?
सर्वे के आंकड़े फिलहाल योगी आदित्यनाथ और BJP-led NDA को बढ़त दिखा रहे हैं, लेकिन चुनाव 2027 में होने हैं और तब तक राजनीतिक समीकरण कई बार बदल सकते हैं. ऐसे में इन आंकड़ों को मौजूदा जनमत का संकेत माना जा सकता है, अंतिम चुनावी नतीजा नहीं.
