मध्य प्रदेश में इन दिनों निगम मंडलों और विभिन्न प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला लगातार जारी है. अब तक करीब 60 नेताओं को अध्यक्ष और सदस्य के रूप में जिम्मेदारियां सौंपी जा चुकी हैं. इन नियुक्तियों में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के नेताओं का प्रभाव साफ नजर आ रहा है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है.
सिंधिया समर्थकों की अनदेखी पर उठे सवाल
भाजपा ने इस बार संगठन से जुड़े नेताओं के साथ उन चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी दी है, जिन्हें लंबे समय से सिंधिया विरोधी खेमे का माना जाता रहा है. इसी कड़ी में गुना-शिवपुरी के पूर्व सांसद KP Yadav को मध्य प्रदेश राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए वरिष्ठ नेता Ramniwas Rawat को वन विकास निगम की कमान सौंपी गई है. राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की संतुलन साधने वाली रणनीति के तौर पर देख रहे हैं.
सिंधिया समर्थकों को नहीं मिल जगह
हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia के साथ कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेताओं को अभी तक किसी निगम या मंडल में जगह नहीं मिली है. इनमें पूर्व मंत्री Imarti Devi समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं. ऐसे में पार्टी के भीतर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सिंधिया समर्थकों को राजनीतिक नियुक्तियों में नजरअंदाज किया जा रहा है.
भाजपा सिंधिया समर्थकों को भी किसी न किसी जिम्मेदारी में एडजस्ट
सूत्रों के मुताबिक शुरुआत से ही यह माना जा रहा था कि भाजपा सिंधिया समर्थकों को भी किसी न किसी जिम्मेदारी में एडजस्ट करेगी. बताया जाता है कि सिंधिया ने अपने करीबी नेताओं के लिए लगातार प्रयास किए थे. इनमें महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपीएस भदौरिया, गिरिराज दंडोतिया और मुन्नालाल गोयल जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं. सिंधिया का तर्क था कि इन नेताओं ने कठिन समय में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का साथ दिया था, इसलिए इन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए.
सर्मथकों की नाराजगी आ रही सामने
इधर राजनीतिक नियुक्तियों में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे कुछ सिंधिया समर्थकों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है. ग्वालियर के भाजपा नेता और पूर्व पार्षद देवेंद्र पाठक ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने जिला नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी नेता नाराजगी जाहिर कर सकते हैं.
इमरती देवी ने इन अटकलों को ज्यादा महत्व नहीं दिया
हालांकि इमरती देवी ने इन अटकलों को ज्यादा महत्व नहीं दिया है. उनका कहना है कि वे किसी पद के लिए नहीं बल्कि पार्टी के लिए काम करती हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा में सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलता है और पार्टी नेतृत्व जो भी फैसला करेगा, वह उन्हें स्वीकार होगा. वहीं सरकार और संगठन का कहना है कि नियुक्तियों में जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक समन्वय को ध्यान में रखा गया है. साथ ही संकेत दिए गए हैं कि आगे की सूची में बाकी नेताओं को भी मौका मिल सकता है.
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