मध्य प्रदेश की राजनीति में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही हैं. राज्य के विभिन्न मंडलों, आयोगों और प्राधिकरणों में अधिकांश नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं. इसके अलावा हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे भी सामने आ चुके हैं. ऐसे में अब प्रदेश की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा कैबिनेट विस्तार को लेकर हो रही है. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल किया जा सकता है. माना जा रहा है कि मौजूदा कैबिनेट के कुछ मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, जबकि कई नए चेहरों को सरकार में शामिल करने की तैयारी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के लगातार दिल्ली दौरों और शीर्ष भाजपा नेताओं से हुई बैठकों के बाद इस प्रक्रिया को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं.
जून में होने वाली मंत्रिमंडल विस्तार में इन 6 मंत्रियों की छुट्टी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जून के अंतिम सप्ताह तक मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा हो सकती है. बताया जा रहा है कि सरकार के प्रदर्शन और विभागीय समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर कुछ मंत्रियों के कामकाज का आकलन किया गया है. इसी के आधार पर 5 से 6 मंत्रियों को हटाने और लगभग इतने ही नए विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है.
इनकों मिलेगा नया मौका
कुछ बड़े नामों को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं. कहा जा रहा है कि वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना है. वहीं प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र स्तर पर संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है. इसके अलावा विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे मंत्री विजय शाह का नाम भी संभावित बदलावों की सूची में बताया जा रहा है.राज्य मंत्रियों में दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी के नाम भी चर्चा में हैं. माना जा रहा है कि विभागीय प्रदर्शन के आधार पर इन पदों में बदलाव हो सकता है. नए चेहरों की बात करें तो सागर क्षेत्र से शैलेंद्र जैन और प्रदीप लारिया के नामों पर विचार होने की चर्चा है. बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह भी संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं. वहीं सिंधिया समर्थक नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की वापसी की संभावना भी जताई जा रही है. सूत्रों का यह भी कहना है कि इस बार बदलाव केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगा. कई विभागों की जिम्मेदारियों में भी फेरबदल किया जा सकता है. वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 31 है, जबकि चार पद अभी भी खाली हैं. ऐसे में आगामी विस्तार को प्रदेश सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है.
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