भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में पहली बार जिला स्तर पर रायशुमारी के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्षों का ऐलान कर दिया था, इनमें सबसे खास बात यह थी कि कई कद्दावर विधायकों तक को जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर नया प्रयोग किया गया, जिसमें जयवर्धन सिंह, ओमकार सिंह मरकाम, महेश परमार समेत बड़े चेहरे प्रियव्रत सिंह समेत निलय डागा, चिंटू चौकसे, विपिन वानखेड़े, डॉ. अशोक मस्कोले, हर्ष विजय गेहलोत का नाम शामिल था, लेकिन अब इन नेताओं को अपनी कार्यकारिणी का गठन करना है, जिसको लेकर एक नया एक्शन प्लान तैयार किया गया है कि संगठन में रहना होगा तो पार्षद के टिकट की दावेदारी को छोड़ना होगा, जिनमें वर्तमान के पार्षद भी शामिल है।
कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान
संगठन सृजन अभियान के तहत 50 लोगों की कार्यकारिणी तय करना होगा, इसमें ही काफी मशक्कत करना पड़ रही है। कांग्रेस के आला नेता अपने समर्थकों को कार्यकारिणी में स्थान दिलाने में जुटे हैं, ऐसे में तय संख्या से ज्यादा दावेदार सामने आ रहे हैं जोकि काफी माथापच्ची के बाद भी कम होने के नाम नहीं ले रहे, इसीलिये कई जिलों की सूची को अंतिम मुहर लगाने के लिए पीसीसी को भेज दिया गया है, और अब वहीं से अंतिम मुहर लगेगी।
पार्षद के दावेदारों के लिए यह दिया तर्क
कांग्रेस का मानना है कि अगर किसी पार्षद के टिकट के दावेदार को जिला कार्यकारिणी में जगह दे दी गई, तो चुनाव के पहले से अपने वार्ड तक सीमित हो जाएगा, ऐसे में उसकी जिला स्तरीय जिम्मेदारी का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा, इसीलिये अभी से फॉर्मूला तय कर दिया गया है कि अपनी पार्षदी वाली दावेदारी वाले नेता खुद ही अभी से पीछे हट जाएं। साथ ही अबकी बार सक्रिय नेताओं को ही संगठन में जगह देने की तैयारी है, क्योंकि अगर निष्क्रिय नेताओं को कार्यकारिणी में स्थान दे दिया गया तो वो संगठन सृजन अभियान पर पलीता साबित होगा।


