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MP में बिजली ने रुलाया, हुई इतनी महंगी, 1 अप्रैल से लगेगा झटका

मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अप्रैल की शुरुआत एक नई चुनौती लेकर आने वाली है. राज्य में बिजली की दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है, जिसका सीधा असर आम लोगों के मासिक बजट पर पड़ेगा. 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों के बाद घरों में आने वाला बिजली बिल पहले की तुलना में ज्यादा हो जाएगा. बिजली कंपनियों ने लागत में बढ़ोतरी और संचालन खर्च को देखते हुए टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है. इसके चलते अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए दरों में बदलाव किया गया है. घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को भी इस बढ़ोतरी का असर झेलना पड़ेगा.

इतने के बाद बढ़ेगा बिल

नई व्यवस्था के तहत 151 यूनिट का स्लैब पार करते ही प्रति यूनिट दर के साथ-साथ फिक्स्ड चार्ज में बढ़ोतरी होगा. फिक्स्ड चार्ज को 28 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए प्रति 0.1 किलोवॉट कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं का कुल बिल बढ़ना तय है. हालांकि आयोग ने निम्न दाब (एलवी-1) और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए उनकी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके अलावा, 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह रियायत मिलती रहेगी. लेकिन 150 यूनिट से ज्यादा खपत करने वालों पर इस बढ़ोतरी का असर पड़ेगा.

इतना आएगा बिल

अगर बिजली की खपत के आधार पर नए बिल का अंदाजा लगाया जाए, तो बढ़ोतरी साफ नजर आती है. उदाहरण के तौर पर, जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 150 यूनिट से ज्यादा है, उनका बिजली बिल करीब 1017 रुपए तक पहुंच सकता है, जो लगभग 4.94 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है. इसी तरह, अगर खपत 200 यूनिट से ऊपर जाती है, तो बिल बढ़कर करीब 1696 रुपए तक हो सकता है, यानी इसमें करीब 5.30 प्रतिशत का इजाफा होगा. वहीं 250 यूनिट बिजली इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं को लगभग 2183 रुपए तक भुगतान करना पड़ सकता है, जो करीब 5.10 प्रतिशत ज्यादा है. अगर खपत 300 यूनिट के आसपास रहती है, तो बिल करीब 2668 रुपए तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें लगभग 4.98 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है. इसके अलावा, जिन लोगों की बिजली खपत 400 यूनिट से अधिक है, उन्हें करीब 3689 रुपए तक का बिल मिल सकता है, जो लगभग 4.82 प्रतिशत ज्यादा है.

क्या बोले उर्जा विभाग

ऊर्जा विभाग का कहना है कि बिजली उत्पादन और वितरण की लागत लगातार बढ़ रही है. कोयले की कीमत, ट्रांसपोर्टेशन और रखरखाव जैसे खर्चों में इजाफा हुआ है, जिसकी वजह से दरों में संशोधन जरूरी हो गया था. अधिकारियों के अनुसार, अगर समय-समय पर दरों में बदलाव नहीं किया जाए, तो बिजली कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गरीब और कमजोर वर्गों को राहत देने के लिए कुछ विशेष प्रावधान बनाए गए हैं. कुछ श्रेणियों में सब्सिडी जारी रहेगी, जिससे इन उपभोक्ताओं पर बढ़ोतरी का असर कम हो सके. इसके अलावा कम खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भी सीमित स्तर पर राहत मिलने की संभावना है.

ऐसे बचाए बिजली

विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं को अब बिजली के उपयोग को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. अनावश्यक बिजली खर्च को कम करके वे अपने बिल को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं. ऊर्जा की बचत के लिए एलईडी बल्ब, ऊर्जा दक्ष उपकरण और सोलर विकल्प जैसे उपाय अपनाना भी फायदेमंद साबित हो सकता है.

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