Monday, November 2, 2026
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MP Government Loan: मोहन सरकार फिर लेगी 2800 करोड़ का कर्ज, वित्त वर्ष में कुल उधारी 9200 करोड़ पहुंची

भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज लेने जा रही है। राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से 2800 करोड़ रुपए की राशि दो अलग-अलग किस्तों में जुटाएगी। इस नई उधारी के साथ चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 9200 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

दो चरणों में जुटाई जाएगी राशि

वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण के तहत 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपए के बॉन्ड जारी किए जाएंगे। पहली किस्त 1600 करोड़ रुपए की होगी, जिस पर 7.64 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर निर्धारित की गई है। वहीं 1200 करोड़ रुपए के दूसरे ऋण पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा। दोनों ऋणों की सिक्योरिटी नीलामी RBI के जरिए कराई जाएगी और भुगतान प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी की जाएगी।

2034 और 2048 तक चुकाना होगा कर्ज

सरकार का पहला ऋण वर्ष 2034 तक की अवधि के लिए रहेगा, जबकि दूसरा ऋण लंबी अवधि का है, जिसकी परिपक्वता वर्ष 2048 में होगी। इन ऋणों का भुगतान सरकार अप्रैल और अक्टूबर में छह-छह माह के अंतराल पर निर्धारित किस्तों में करेगी।

अप्रैल से ही शुरू हो गई थी उधारी

इस बार प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष की शुरुआत से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया था। अप्रैल 2026 में सरकार ने दो चरणों में कुल 4600 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। इसके बाद मई में 1800 करोड़ रुपए की उधारी की गई और अब 2800 करोड़ रुपए के नए ऋण की तैयारी है। इस तरह सिर्फ दो महीनों के भीतर राज्य सरकार बाजार से 9200 करोड़ रुपए की राशि जुटा चुकी है।

विकास परियोजनाओं पर खर्च होगी राशि

सरकार का कहना है कि बॉन्ड के जरिए जुटाई गई राशि का उपयोग राज्य की विकास योजनाओं में किया जाएगा। इसमें सिंचाई परियोजनाएं, कृषि क्षेत्र, ऊर्जा विकास, सड़क और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं। राज्य सरकार का दावा है कि इन निवेशों से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं को वित्तीय समर्थन मिलेगा।

राजस्व और व्यय लगभग बराबर

राजपत्र में प्रकाशित संशोधित अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश की कुल राजस्व प्राप्ति करीब 2.79 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। वहीं राजस्व व्यय भी लगभग इसी स्तर पर रहने का अनुमान है। ऐसे में विकास परियोजनाओं और पूंजीगत खर्चों के लिए सरकार बाजार से उधारी का सहारा ले रही है। राज्य सरकार का तर्क है कि दीर्घकालिक विकास कार्यों के लिए लिया गया ऋण भविष्य में आर्थिक वृद्धि और बुनियादी ढांचे के विस्तार में सहायक साबित होगा।

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