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Friday, April 17, 2026
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MP के सरकारी स्कूलों के हाल फिर उजागर… हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, सरकार से मांगी जानकारी

सरकार को 6 सप्ताह में देना होगा जवाब

जबलपुर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की सरकारी स्कूलों की स्थिति किस कदर है, ये किसी से छिपा नहीं है, खबरों में समय-समय पर सामने आता रहता है कि कहीं पर छत नहीं है, तो कहीं बारिश में टपकती है, कहीं पर किराये के मकान में स्कूल लगाई जाती है, तो कहीं पर पेड़ के नीचे स्कूल चल रहे हैं। ऐसे में अब इस तरह की स्थिति को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्ती जाहिर की, हाईकोर्ट ने स्कूलों की स्थिति पर संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में की है, इस सुनवाई में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने राज्य सरकार पर सख्ती दिखाते हुए विस्तृत जानकारी कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं।

एक खबर के बाद हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
जबलपुर के करौंदी स्थित कैंट स्कूल की बदहाली के संबंध में खबर प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करने के आदेश जारी किए थे। याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया कि वो स्कूल राज्य सरकार के अधीन नहीं है, स्थानीय निकाय स्कूल का संचालन करती है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए आदेश में कहा कि पूरे प्रदेश में राज्य सरकार व स्थानीय निकायों द्वारा संचालित सभी स्कूलों की संख्या और उनकी मौजूदा स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की सम्पूर्ण जानकारी अगली सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

मुख्य सचिव व शिक्षा विभाग के पीएस को दिया आदेश
जनहित याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को अनावेदक बनाया गया था, HC की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब पेश करने के आदेश जारी किए हैं। प्रदेश सरकार और स्थानीय निकाय द्वारा संचालित स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर और उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत विवरण पेश करने के निर्देश जारी किए हैं, जिसके लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है, युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की है।

स्थानीय निकायों की कितनी स्कूलें?
इस मामले में शिक्षा विभाग के पल्ला झाड़ने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है किपेश की जाने वाली रिपोर्ट केवल शिक्षा विभाग के स्कूलों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, कोर्ट ने इस रिपोर्ट में उन स्कूलों की जानकारी भी मांगी है, जिन्हें स्थानीय निकाय खुद संचालित करते हैं। इनमें नगर निगम, नगर पालिका और अन्य स्थानीय प्रशासनिक संस्थाओं के तहत चलने वाले स्कूलों के नाम होंगे।

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