भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में अब महापौर निधि जैसा कुछ नहीं होगा। सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए महापौर निधि से होने वाले कामों पर रोक लगा दी है। महज इंदौर में ही महापौर निधि से करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से हर साल काम होते थे, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं होगा। इसको लेकर राज्य शासन ने आदेश जारी कर दिया है। आदेश में बताया गया है कि बजट में रखी जाने वाली महापौर निधि का निगम के अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में पार्षद के काम नहीं करने की स्थिति में महापौर के द्वारा किए जाने वाले काम अब नहीं होंगे।
सरकार ने किया आदेश जारी
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव प्रमोद कुमार शुक्ला ने समस्त नगर निगम आयुक्तों को आदेश जारी किया है। इसमें निगम के बजट में महापौर निधि का प्रावधान किए जाने पर रोक के बारे में जानकारी दी गई है। बताया जा रहा है कि राज्य शासन के यह तथ्य संज्ञान में आया कि नगर पालिक निगमों द्वारा अपने बजट में महापौर निधि का प्रावधान किया जाता है, जबकि मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम-1956 के अध्याय 7 में नगर पालिका निधि के प्रावधान वार्णित है। इसमें वित्तीय वर्ष में निगम की प्राप्तियों और आय का अनुमान पत्रक (बजट प्रस्ताव) में महापौर निधि के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए समस्त निगमायुक्तों को निर्देशित किया गया है कि निगम बजट प्रस्ताव तैयार करते समय निगम अधिनियम और मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम (लेखा एवं वित्त) नियम 2018 में दिए गए प्रावधान अनुसार ही कार्रवाई करें।
बजट में था महापौर निधि का प्रावधान
पहले बजट में हर साल मेयर अपनी महापौर निधि के जरिए 10 करोड़ रुपये के काम सीधे अपने मद से करा दिया करते थे। जिसका इस्तेमाल वो सीधे अपनी समझ से किया करते थे, लेकिन अब सरकार के आदेश के बाद महापौर अपने स्तर पर कोई काम नहीं करा पाएंगे। निगम अफसरों ने जानकारी देते हुए बताया कि बजट में महापौर निधि रखना परंपरागत था।
अपनी पसंद से करते थे काम
जानकारी के मुताबिक महापौर अपनी पसंद के पार्षदों को उपकृत करने के लिए महापौर निधि के जरिए कामकाज कराते थे, इसमें से वार्ड में सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, उद्यान और अन्य विकास कार्य कार्य कराए जाते थे, लेकिन अब महापौर को अन्य माध्यमों से बजट पर निर्भर होना पड़ेगा।


