भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की सियासत में मंत्री गौतम टेटवाल की जाति का विवाद फिर गहराता जा रहा है, क्योंकि इंदौर हाईकोर्ट में मंत्री के वकील ने अब नए दस्तावेज पेश किए हैं। इसमें उनकी जाति मोची बताई गई है, जबकि स्कूल दस्तावेजों में उनकी जाति जीनगर बताई गई है। जिसके जवाब में याचिकाकर्ता ने उन पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया है।

ये है पूरा मामला?
मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले की सारंगपुर विधानसभा से विधायक और प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के जाति प्रमाण पत्र विवाद में इंदौर हाईकोर्ट में एक नया मोड़ आया है। मंत्री के वकील ने जज जयकुमार पिल्लई की बेंच के सामने हलफनामे के साथ नए दस्तावेज पेश किए हैं। कोर्ट में याचिकाकर्ता ने बताया कि मंत्री के स्कूल के दस्तावेज में उनकी जाति जीनगर लिखी हुई है। अब स्कूल के प्राचार्य ने एक और प्रमाण पत्र पेश किया है। इसमें उनकी जाति मोची बताई गई है। इसके अलावा नगर पालिका के दाखिला रिकॉर्ड में भी उनके दादा की जाति मोची होने का दावा किया गया है।

फर्जी जाति प्रमाण पत्र से चुनाव लड़ने का आरोप
मंत्री के जाति प्रमाण पत्र को लेकर गुना के कोमलप्रसाद शाक्य हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है, इसमें आरोप लगाया गया है कि विधायक टेटवाल ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा है। याचिकाकर्ता ने इसके जवाब में अपने आरोपों को सही साबित करने के लिए कई जरूरी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए हैं। जैसे कि पिता की सर्विस बुक, परिवार वंशावली और आरटीआई से प्राप्त स्कॉलर पंजी आदि। याचिकाकर्ता के अनुसार 2007 और 2013 में आरटीआई के जरिए रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें विधायक की जाति जीनगर और वर्ग पिछड़ा लिखा है। वहीं बचाव पक्ष ने 2011 का एक प्रमाण पत्र पेश किया है। इसमें जाति मोची लिखी हुई है। याचिकाकर्ता ने इस नए प्रमाण पत्र को संदिग्ध बताते हुए उसकी सत्यता पर सवाल उठाए हैं। जिसमें कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर सारे दस्तावेज साझा किए हैं।
