भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के मंत्री विजय शाह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है, और अब अंदरखानों से खबर छनकर बाहर आ रही है कि मध्य प्रदेश सरकार भी कार्रवाई के मूड में नजर आ रही है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मंत्री विजय शाह से पद भी छीना जा सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ आपराधिक केस चलाने को लेकर अभिमत मांगा है। इस संबंध में एटर्नी जनरल से कानूनी सलाह ली गई है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री के खिलाफ इंदौर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में मामला दर्ज कर केस चलाया जा सकता है।
मंत्री विजय शाह का जा सकता है पद
सियासी जानकारों का मानना है कि सेना की एक महिला अधिकारी के सम्मान से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर कोर्ट की नाराजगी के बाद सबकी नजरें सरकार के फैसले पर टिकी है। जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद भी अगर सरकार ने कड़ा एक्शन नहीं लिया तो सरकार की छवि पर बुरा असर पड़ेगा। अब कहा जा रहा है कि अकेले विजय शाह को हटाने की बजाय कुछ अन्य मंत्रियों पर भी गाज गिरने वाली है, क्योंकि सरकार बनने के आधा वक्त निकलने के बाद, काफी मंत्रियों की बयानबाजी और हरकतों ने लाड़ली बहनों की कही जाने वाली सरकार की छवि पर दाग लगाने का काम किया है।
शाह के साथ किन-किन पर गिरेगी गाज
मंत्री विजय शाह के मंत्री पद पर लटकी तलवार के बाद अगर मंत्रिमंडल विस्तार किया जाता है, तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,नारायण सिंह कुशवाहा, धर्मेद्र सिंह लोधी, प्रतिमा बागरी, गोविंद सिंह राजपूत, लखन पटेल को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है, क्योंकि इनके कारण सरकार की काफी किरकिरी हुई है। पार्टी में इसको लेकर मंथन जारी है कि अगर इन सभी मंत्रियों को हटा दिया जाएगा तो किसको मंत्री पद से नवाजा जा सकता है, हालांकि इसके लिए पार्टी को कवायद करना होगी कि किसी भी तरह के विरोध के स्वर ना सुनाई दे।
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माना जा रहा है कि सीएम डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल विस्तार करने की स्थिति में पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह, अजय विश्नोई, गोपाल भार्गव, उषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, ओमप्रकाश धुर्वे को मंत्री पद से नवाजा जा सकता है। जिसमें सबसे महत्वपूर्व यदि कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर केंद्र की राजनीति में जाते हैं तो उनके खास रमेश मेंदोला को मंत्री पद से नवाजा जा सकता है। इसी तरह से विजय शाह को हटाने के बाद आदिवासी मंत्री के रुप में ओमप्रकाश धुर्वे को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए ही सागर के बिगड़े सियासी समीकरण को भी साधने का प्रयास किया जा सकता है।
निगम-मंडलों की भी हो सकती है साथ में घोषणा
2023 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने वाली बीजेपी के सामने एक और चुनौती यह भी है कि उसके कई सीनियर नेता मंत्री पर से नहीं नवाजे गए, ऐसे में नाराजगी होना भी स्वाभाविक थी, पर पार्टी संगठन के सिपाही के नाते उन्होंने जहर का घूंट पी लिया, लेकिन अब उन्हें निगम-मंडल में जगह मिलने की आस है। जिसको लेकर जानकार बताते हैं कि सारा कुछ एक साथ कर पार्टी भी इस चैप्टर को क्लोज कर सकती है। जिसमें कई पूर्व विधायकों को भी मौका मिल सकता है, जिसमें राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और ध्रुवनारायण सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।


