भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट और मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में अलग-अलग प्रकरणों पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। ग्वालियर-चंबल संभाग के कुछ नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली, जबकि हाई कोर्ट में कुछ कॉलेजों ने सीबीआई जांच कराने के लिए अंडरटेकिंग पेश की है। मामले में अदालतों के रुख के बाद अब संबंधित कॉलेजों की सीबीआई जांच और छात्रों की परीक्षा को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की याचिका की खारिज
ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के कुछ छात्रों ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के 13 अगस्त के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने संबंधित कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। छात्रों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि संबंधित कॉलेजों की सीबीआई जांच पर पहले से सुप्रीम कोर्ट का स्थगन लागू है। ऐसे में पूर्व वर्षों की तरह उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति के लिए उन्हें हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।
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फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच बना बड़ा मुद्दा
मामले में यह बात भी महत्वपूर्ण रही कि वर्ष 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय समिति की जांच में फैकल्टी डुप्लीकेसी के पहलू की जांच नहीं की गई थी। हाई कोर्ट ने इसी आधार पर संबंधित कॉलेजों और छात्रों को बिना सीबीआई जांच के राहत देने से इनकार कर दिया था। अदालत का मानना था कि कॉलेजों की स्थिति और नियमों के पालन को लेकर आवश्यक जांच के बिना परीक्षा की अनुमति देना उचित नहीं होगा।
कॉलेज प्रबंधन से सवाल करने की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान छात्रों की ओर से कॉलेजों को दी गई फीस, डोनेशन और अन्य राशि का मुद्दा भी उठा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने छात्रों से कहा कि वे उस कॉलेज प्रबंधन से सवाल करें, जिसे उन्होंने फीस, डोनेशन या अन्य राशि का भुगतान किया है। कोर्ट ने कहा कि कॉलेज प्रबंधन को सीबीआई जांच का सामना करना चाहिए। यदि कॉलेज नियमों और निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं तो जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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हाईकोर्ट में कॉलेजों ने दी अंडरटेकिंग
इधर, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित नर्सिंग फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य मामलों पर भी सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के संबंधित नर्सिंग कॉलेजों को बिना सीबीआई जांच के राहत देने से फिलहाल इनकार कर दिया। इसके बाद कुछ कॉलेजों की ओर से अदालत में सीबीआई जांच कराने की वचनबद्धता, यानी अंडरटेकिंग पेश की गई।
जांच के बाद परीक्षा पर हो सकता है विचार
हाई कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित कॉलेज सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक स्पष्टीकरण आदेश लेकर आते हैं, तो उनकी जांच कराई जा सकती है। जांच के बाद कॉलेजों की श्रेणी और जांच रिपोर्ट के आधार पर वहां अध्ययनरत छात्रों की परीक्षा आयोजित कराने के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। मंगलवार को कुछ कॉलेजों की ओर से सीबीआई जांच के लिए अंडरटेकिंग पेश किए जाने के बाद हाई कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर ले लिया। साथ ही संबंधित कॉलेजों को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से क्लेरिफिकेशन आदेश लेकर आने के निर्देश दिए हैं।
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अब आगे क्या होगा?
फिलहाल ग्वालियर-चंबल संभाग के संबंधित नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा की अनुमति के लिए तत्काल राहत नहीं मिली है। दूसरी ओर, कुछ कॉलेजों द्वारा सीबीआई जांच कराने की सहमति दिए जाने से मामले में आगे का रास्ता खुल सकता है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट से मिलने वाले स्पष्टीकरण और उसके बाद होने वाली सीबीआई जांच पर टिकी है। जांच में कॉलेजों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद छात्रों की परीक्षा को लेकर आगे निर्णय लिया जा सकता है।
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