Monday, November 2, 2026
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MP Promotion Rules: एमपी में 10 साल बाद प्रमोशन पर बढ़ी हलचल, आज 20 विभागों के साथ सरकार की बड़ी बैठक

MP Promotion Rules: मध्य प्रदेश में लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए सोमवार का दिन अहम माना जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय में 20 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहा है। इस बैठक में मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत विभिन्न संवर्गों में X और Y निर्धारण सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। दूसरी ओर कर्मचारी संगठन स्पीक ने हाईकोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देते हुए सरकार की इस पहल का विरोध किया है।

सरकार ने तेज की पदोन्नति प्रक्रिया की तैयारी

मध्य प्रदेश में पिछले करीब एक दशक से सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नतियां रुकी हुई हैं। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद राज्य सरकार ने अब पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को वल्लभ भवन स्थित मंत्रालय में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 20 विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में विभिन्न विभागों के स्थापना अधिकारियों को भी शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।

विभागों से मांगी जाएगी संवर्गवार जानकारी

बैठक में अलग-अलग विभाग अपने कर्मचारियों के संवर्ग, स्वीकृत पद, रिक्त पदों की स्थिति और पदोन्नति की आवश्यकता से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत X और Y निर्धारण को लेकर भी विभागों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे। इन प्रस्तावों के आधार पर शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

साढ़े चार लाख कर्मचारियों को प्रमोशन का इंतजार

प्रदेश में करीब 4.50 लाख सरकारी कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। लंबे समय से प्रमोशन नहीं होने के कारण कई विभागों में वरिष्ठ कर्मचारियों की पदस्थापना प्रभावित हुई है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रमोशन प्रक्रिया शुरू होती है तो बड़ी संख्या में पद खाली होंगे, जिन पर नई भर्ती का रास्ता भी खुलेगा। इससे युवाओं को सरकारी नौकरियों के अवसर मिल सकते हैं।

क्या है X और Y का फार्मूला

मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 में आरक्षित वर्गों के प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए X और Y का प्रावधान रखा गया है। अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। X और Y का निर्धारण शून्य से एक के बीच किया जाएगा। आमतौर पर X और Y का मान एक-एक रखा जाएगा। यदि किसी विभाग में अलग व्यवस्था करनी हो तो मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की मंजूरी लेनी होगी। यह निर्धारण पांच वर्षों के लिए लागू रहेगा।

स्पीक ने जताया विरोध

सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कर्मचारी संस्था स्पीक ने सरकार की इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। संस्था का कहना है कि जब तक जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित मामलों का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक सरकार को नई पदोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं करनी चाहिए। संस्था ने आरोप लगाया है कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने विवादित पदोन्नतियों की समीक्षा नहीं की और न ही सामान्य, पिछड़ा तथा अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों को न्याय मिल सका।

नए नियमों पर उठे सवाल

स्पीक का कहना है कि नए पदोन्नति नियमों में कई कमियां अभी भी मौजूद हैं। संस्था के अनुसार क्रीमीलेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके अलावा आरक्षित और अनारक्षित पदों की गणना की प्रक्रिया भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे विभागीय स्तर पर भ्रम और विवाद की स्थिति बन सकती है। संस्था ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अदालत में आश्वासन दिया था कि अंतिम फैसला आने तक नई पदोन्नतियां नहीं की जाएंगी, लेकिन अब प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की अपील वापस लेने की मांग

स्पीक के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. केएस तोमर ने कहा है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील वापस लेकर हाईकोर्ट के निर्णय के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुरानी विवादित पदोन्नतियों की समीक्षा किए बिना नई प्रक्रिया शुरू की गई तो प्रदेशभर में कर्मचारी आंदोलन किया जाएगा।

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