मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है. कांग्रेस ने संभावित चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. दिल्ली में हाल ही में हुई एक अहम बैठक ने साफ संकेत दे दिए हैं कि पार्टी इस बार कोई भी चूक नहीं करना चाहती. इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. इसे पार्टी के कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है.
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अलर्ट
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सबसे ज्यादा जोर एकजुटता बनाए रखने पर दिया गया. पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा की अपनी संभावित सीट को सुरक्षित रखने के लिए सभी विधायकों को एक साथ खड़ा होना होगा. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर भी सतर्क रहने की बात कही गई. असंतुष्ट नेताओं को मनाने और उनकी नाराजगी दूर करने की रणनीति भी तैयार की जा रही है. बताया जा रहा है कि जल्द ही भोपाल में विधायकों से अलग अलग समूहों में बातचीत की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अंदरूनी समस्या को समय रहते सुलझाया जा सके.
कमलनाथ का नाम भी चर्चा में
उम्मीदवार के चयन को लेकर भी कांग्रेस काफी सोच समझकर कदम बढ़ा रही है. चर्चा यह है कि दिग्विजय सिंह खुद को इस दौड़ से अलग कर चुके हैं. ऐसे में पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जिसे सभी गुट आसानी से स्वीकार कर सकें. इस बीच कमलनाथ का नाम भी चर्चा में बना हुआ है, हालांकि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान ही करेगा.
एक सीट जीतने के लिए इतने का समर्थन होना जरूरी
संख्या के लिहाज से देखें तो कांग्रेस के सामने चुनौती कम नहीं है. 230 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए लगभग 58 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है. कागजों पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखती है, लेकिन कुछ विधायकों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. एक विधायक की सदस्यता से जुड़ा मामला कोर्ट में है, जबकि एक अन्य के मतदान को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है. ऐसे में हर एक वोट कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. वहीं दूसरी तरफ भाजपा अपने आंकड़ों के दम पर दो सीटों को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही है. अगर पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है. जानकारों का मानना है कि थोड़ी सी भी क्रॉस वोटिंग कांग्रेस की रणनीति को प्रभावित कर सकती है.
