सीधी/बृजेश पाण्डेय/खबर डिजिटल/ सीधी जिले में निर्माणाधीन ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बहुचर्चित परियोजना को लेकर अब करीब 100 करोड़ रुपये की रॉयल्टी गबन का गंभीर आरोप सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है।
आरोपों की बौछार
आरोप है कि पिछले लगभग पांच वर्षों से पटरी बिछाने के कार्य में भारी मात्रा में मिट्टी और मुरुम का उपयोग किया गया, लेकिन नियमों के अनुसार खनिज विभाग को देय रॉयल्टी की राशि जमा नहीं की गई। खनन नियमों के तहत किसी भी ठेकेदार को खनिज सामग्री के उपयोग से पहले अनुमति लेना और रॉयल्टी जमा करना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद यह खेल वर्षों तक खुलेआम चलता रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चुप्पी क्यों बनी रही।
रॉयल्टी के नाम पर मात्र 30 लाख रुपये
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में कलेक्टर स्वरोचिस सोमवंशी और खनिज अधिकारी कपिल मुनि शुक्ला ने जब रेलवे विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार से जवाब-तलब किया, तब जाकर ठेकेदार गोपाल सिंह जोधा ने रॉयल्टी के नाम पर मात्र 30 लाख रुपये जमा किए। जबकि विभागीय आकलन के अनुसार अब भी करीब 100 करोड़ रुपये की रॉयल्टी बकाया बताई जा रही है।
पं. केदारनाथ शुक्ला का निशाना
इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सीधी क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके पंडित केदारनाथ शुक्ला ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर क्षेत्रीय सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और विधायक रीति पाठक पर सवाल उठाते हुए कहा कि “इतने बड़े पैमाने पर रॉयल्टी का गबन हुआ और जनप्रतिनिधि सिर्फ निरीक्षण करते रहे। सवाल उठाने के बजाय सबने अपनी-अपनी रोटी सेकने का काम किया।”
सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग
पूर्व विधायक ने साफ शब्दों में पूछा कि “100 करोड़ रुपये की रॉयल्टी का गबन आखिर किसके इशारे पर हुआ और इतने वर्षों तक कार्रवाई से अधिकारियों को किसने रोके रखा?” उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, ठेकेदारों और संरक्षण देने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।


