MP Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाली चुनावी जंग ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है। संख्या बल के हिसाब से एक सीट कांग्रेस के खाते में सुरक्षित दिख रही है, लेकिन राज्यसभा कौन जाएगा इसके लिए पार्टी के अंदर मचे घमासान और कानूनी उलझनों ने समीकरणों को पेचीदा बना दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद अब सीट को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
किसके सिर सजेगा ताज?
कांग्रेस के अंदर तीन अलग-अलग समीकरणों पर मंथल किया जा रहा है। जिसने पार्टी आलाकमान की टेंशन बढ़ा दी है। सूत्रों की माने तो दिग्विजय ने ब्राह्मण कार्ड खेलने की चाल चलना शुरू कर दिया है। दिग्विजय सिंह ने इस बार खुद पीछे हटकर अपने सिपहसालार पीसी शर्मा का नाम आगे किया है। उनका मानना है कि शर्मा को राज्यसभा भेजकर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक को साधा जा सकता है।
राहुल गांधी की पसंद
सूत्रों की मानें तो दिल्ली दरबार से मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे आगे चल रहा है। राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा होने के चलते उनकी दावेदारी को सबसे मजबूत माना जा रहा है। इसके अलावा कांग्रेस अगर दलित दांव चलती है तो पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का नाम सामने आ रही है। सज्जन सिंह भी अपनी सीनियरिटी और दलित वर्ग के आधार पर रेस में बने हुए हैं।
विधायकों की संख्या ने बढ़ाई धड़कनें
कांग्रेस पार्टी राज्यसभा चुनाव मेंं किसी न किसी नेता को तो खड़ा करेगा ही, लेकिन चुनाव से पहले विधायकों की संख्या ने कांग्रेस की धड़कने बढ़ा दी है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता उम्मीदवारों के नाम नहीं, बल्कि 58 वोटों का वो जादुई आंकड़ा है जो जीत के लिए अनिवार्य है। पार्टी के पास फिलहाल वोट संख्या बल तो हैं, लेकिन गणित गड़बड़ा नजर आ रहा है। क्योंकि मुकेश मल्होत्रा को राहत के बावजूद वोटिंग का अधिकार नहीं मिल पाना एक बड़ा झटका है। वही हाल ही में दतिया विधायक राजेंद्र भारती को सजा का ऐलान हुआ है, जिसके चलते उनके वोट पर संशय के बादल मंडराने लगे है। तो वही निर्मला सप्रे का रुख कांग्रेस के पक्ष में जाता दिखाई नहीं दे रहा है। जिसके चलते कांग्रेस के पास विधायक संख्याबल घटकर 63 के आसपास सिमट गया है। इसके अलावा भाजपा की सक्रियता और क्रॉस वोटिंग की आशंका ने कांग्रेस के लिए ‘खतरे की घंटी’ बजती सुनाई दे रही है।


