डिंडोरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ विकासखंड करंजिया की ग्राम पंचायत बरबसपुर में इन दोनों सरकारी धन के दुरुपयोग का और निर्माण कार्य में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है, यहां 15 लाख रुपए की लागत से बन रहा नया पंचायत भवन अपनी मजबूती से ज्यादा अपने घटिया निर्माण के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।
5 साल पहले मिली थी अनुमति
भवन के निर्माण की स्वीकृति लगभग 5 वर्ष पूर्व मिल चुकी थी, उम्मीद थी कि लंबे इंतजार के बाद एक अच्छा और मजबूत भवन बनेगा, लेकिन काम शुरू होते ही भ्रष्टाचार की परते खुलने लगी, ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण की शुरुआत के पहले ही कुछ राशि बिल लगाकर निकाल ली गई है, जो सीधे तौर पर गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
गुणवत्ता पर उठाए जा सकते हैं सवाल
मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को देखकर कोई भी व्यक्ति उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठा सकता है, निर्माण में प्रयोग होने वाली सामग्री और तकनीक में गंभीर खामियां पाई गई दीवारों में उपयोग होने वाली ईंट गुणवत्ता हीन और टूटी-फूटी है ईंटों में भी असमानता पाई गई है। सीमेंट और रेत के मिश्रण का अनुपात निर्धारित मानकों के विपरीत बहुत कम रखा गया है, जिससे दीवारों की पकड़ बेहद कमजोर है।
ग्रामीणों ने लगाया आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बीम और कालम के लिए निर्धारित मोटी से भी पतली सरिया का उपयोग किया जा रहा है, ढलाई से पहले जो पिंजरा तैयार किया गया है, तकनीकी रूप से बहुत कमजोर नजर आ रहा है. भवन के आधार की ऊंचाई मानक से काफी कम रखी गई है, इसके पहले ही बरसात में भवन के भीतर पानी भरने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने कही आंदोलन की बात
ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन सार्वजनिक संपत्ति है और यदि उसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया गया तो वह बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि जो काम हो चुका है, उसे तोड़कर फिर से मानकों के अनुसार कराया जाए। कार्य 15 लाख की लागत वाला है, भवन प्रशासन के दावों और धरातल की हकीकत के बीच के अंतर को साफ बयां कर रहा है।
निर्माण एजेंसी को किया नोटिस जारी
मामले में करंजिया विकासखंड की एसडीओ कशिश नायक का कहना है कि शिकायत प्राप्त होते ही हमने निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी कर दिया है, जल्द ही एक तकनीकी टीम मौके पर जाकर निर्माण की जांच करेगी जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि नोटिस के बाद क्या वास्तव में सुधार होता है, या यह केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।


