राजगढ़/ धर्म राज सिंह/ खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक दावों को झकझोर कर रख दिया है। जिले के छापीहेड़ा थाना क्षेत्र में एक बार फिर आवारा कुत्तों का कहर बरपा है, जहां मात्र डेढ़ साल की मासूम बच्ची, भव्या, कुत्तों के खूनी हमले का शिकार हो गई।
खेल रही मासूम पर काल बनकर टूटे कुत्ते
जानकारी के अनुसार, मासूम भव्या अपने नानी के घर के बाहर खेल रही थी। खुशियों भरे माहौल के बीच किसी ने सोचा भी नहीं था कि बाहर मौत का झुंड घात लगाकर बैठा है। अचानक आवारा कुत्तों के एक हिंसक झुंड ने बच्ची पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मंजर इतना खौफनाक था कि कुत्ते मासूम को घसीटते और नोचते हुए काफी दूर तक ले गए। बच्ची की चीखें शायद उन बेजुबान दरिंदों के शोर में दब गई थीं।
मां ने दिखाई बहादुरी
जब काफी देर तक बच्ची की आवाज सुनाई नहीं दी, तो उसकी मां उसे ढूंढते हुए घर से बाहर निकली। बाहर का नजारा देखकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी नन्हीं जान को कुत्तों का झुंड घेरकर नोच रहा था। मां ने अपनी जान की परवाह किए बिना कुत्तों से मुकाबला किया और लहूलुहान हालत में अपनी कलेजे के टुकड़े को उनके चंगुल से छुड़ाया।
हालत गंभीर, प्रशासन पर खड़े हुए सवाल
बच्ची को तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। हालांकि, जख्म इतने गहरे और गंभीर थे कि डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए शाजापुर रेफर कर दिया है। वर्तमान में बच्ची की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
कब जागेगा कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन?
राजगढ़ जिले में यह कोई पहली घटना नहीं है। लगातार हो रहे हमलों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका हाथ पर हाथ धरे बैठी है। “नसबंदी” और “डॉग शेल्टर” के तमाम दावे कागजी नजर आ रहे हैं। सड़कों पर घूमते ये खूनी कुत्ते अब बच्चों के काल बन रहे हैं। आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या उसे किसी बड़ी अनहोनी या मासूम की जान जाने का इंतजार है? छापीहेड़ा की इस घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
