Rajendra Bharti: मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद पहली बार उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ी है। पद जाने के बाद मीडिया के सामने आए भारती ने सत्ता पक्ष पर हमला करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ झूठ और भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।
2008 से शुरू हुआ दबाव…
राजेंद्र भारती ने भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लेते हुए कहा कि विवादों की जड़ साल 2008 से जुड़ी है। उन्होंने दावा किया कि जब डबरा सीट आरक्षित होने के बाद नरोत्तम मिश्रा दतिया आए, तब से ही क्षेत्र में राजनीतिक दबाव और विरोधियों को कुचलने के साजिशे शुरू हुई। भारती के मुताबिक, उनके परिवार और व्यापार को निशाना बनाने के लिए उन पर कई झूठे मुकदमे लगाए गए।
धमकी और केस वापस लेने का दबाव
पूर्व विधायक ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि हाल के दिनों में उन पर पुराने मामले वापस लेने के लिए भारी दबाव बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें धमकियां दी गईं ताकि वे पीछे हट जाएं, लेकिन वे डरे नहीं। भारती ने साफ तौर पर कहा है कि उनकी सदस्यता खत्म करना इसी दबाव की राजनीति का हिस्सा है।
खुद को बताया ‘सियासत का राणा सांगा’
राजेंद्र भारती ने अपनी तुलना इतिहास के महान योद्धा राणा सांगा से करते हुए एक नया विवाद छेड़ दिया है। उन्होंने कहा, जिस तरह राणा सांगा को अपनों और दुश्मनों के षड्यंत्र का शिकार बनाया गया था, ठीक वैसा ही राजनीतिक षड्यंत्र मेरे साथ दतिया में रचा गया है। इस तुलना के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और तेज होने की उम्मीद है।
कांग्रेस को न्यायपालिका पर भरोसा
मामले को लेकर पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने राजेंद्र भारती का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई साजिश के तहत है और पार्टी को पूरी उम्मीद है कि न्यायालय से भारती को न्याय मिलेगा और उनकी सदस्यता बहाल होगी।


