Rajendra Bharti: मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी सदस्यता रद्द होने के बाद एक ऐसा खुलासा किया है जिसने राजनीतिक गलियारों में भूकंप ला दिया है। बीते सोमवार को भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भारती ने आरोप लगाया कि उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए 70 करोड़ रुपये और निगम-मंडल की अध्यक्षता का ऑफर दिया गया था।
केंद्रीय मंत्री के OSD ने दिया था ऑफर
राजेंद्र भारती ने मीडिया के सामने दावा किया कि मई 2024 में दिल्ली में एक केंद्रीय मंत्री के ओएसडी ने उनसे मुलाकात की थी। भारती के अनुसार ओएसडी ने उन्हें संदेश दिया था कि वे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ चल रहे सभी केस वापस ले लें और भाजपा का दामन थाम लें। भाजपा में आने के बदले उन्हें 70 करोड़ रुपये और एक बड़ा सरकारी पद ऑफर किया गया था। ऑफर ठुकराने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। भारती ने कहा कि वक्त आने पर वे उस ओएसडी के नाम का भी खुलासा करेंगे।
सोची समझी साजिश
राजेंद्र भारती ने अपनी सदस्यता निरस्त होने को नरोत्तम मिश्रा की सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि 27 साल पुराने बैंक एफडी मामले में गवाहों पर दबाव बनाकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने की मांग की है। बता दें कि दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने भारती को दोषी करार दिया था, जिसके बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी।
मानसिक संतुलन खो बैठे भारती
इधर, भाजपा ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि राजेंद्र भारती के आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं। अग्रवाल ने तंज कसते हुए कहा कि विधायकी जाने के बाद वे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं।
दतिया में उपचुनाव की आहट
राजेंद्र भारती ने 2023 के चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को 7742 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर किया था। अब उनकी सदस्यता जाने के बाद दतिया में उपचुनाव की स्थिति बन रही है। माना जा रहा है कि भाजपा यहां से फिर नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतार सकती है। फिलहाल, सबकी निगाहें 15 अप्रैल पर टिकी हैं, जब दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई होनी है।


