इंदौर/ खबर डिजिटल/ केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रस्तावित दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जारी है। इसी सिलसिले में आज इंदौर एयरपोर्ट पर प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक एडीएम रोशन राय की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में बताया गया कि केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का 26 और 27 अगस्त को इंदौर दौरा प्रस्तावित है। वे 26 अगस्त की शाम को इंदौर से आकर सीधे डॉ. अम्बेडकर नगर महू जाएंगे। महू से वे अगले दिन 27 अगस्त को पूर्वान्ह में इंदौर आकर नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे। बैठक में रोशन राय ने निर्देश दिए कि सभी तैयारियां निर्धारित मापदंड के अनुसार सुनिश्चित की जाए। बैठक में आवागमन, आवास, सुरक्षा, आकस्मिक चिकित्सा सहित अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
दूसरी तरफ, महापौर अड़े, व्यापारी भड़के–सराफा चौपाटी पर टकराव तेज, हटाने बनाम बचाने की जंग
इंदौर का सराफा इलाका रात को खाने-पीने के शौकीनों के लिए जन्नत माना जाता है, लेकिन इसी चमक के पीछे विवाद की गहरी दरार है। सोमवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में निगम मुख्यालय में सराफा व्यापारी एसोसिएशन और चौपाटी संघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस बहुप्रतीक्षित बैठक से समाधान की उम्मीद थी, लेकिन महापौर के बयान ने माहौल और गर्मा दिया। महापौर ने दो टूक कहा दिया कि चौपाटी हटेगी नहीं, यथास्थान ही रहेगी और यदि ओटले से दुकानों को हटाया गया,तो सड़क दी जाएगी..जिस पर विवाद गहरा गया..महापौर ने साफ किया कि पारम्परिक व्यंजनों की दुकानों को ही अनुमति दी जाएगी ।
दूसरी ओर, सराफा व्यापारी संघ इस फैसले से सहमत नहीं हुआ। उनका कहना है कि ग्राहकों की सुरक्षा और व्यवसायिक असुविधाओं का स्थायी हल केवल चौपाटी को शिफ्ट करने से ही संभव है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो चरणबद्ध आंदोलन होगा और जरूरत पड़ी तो मामला अदालत तक भी ले जाया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने ओटले खाली करवाने की भी बात कह दी, जिससे चौपाटी के संचालन पर सीधा असर पड़ सकता है। व्यापारियों ने भी कहा कि सराफा चौपाटी कोई धरोहर नहीं है,पहले स्थाई खान पान की दुकानें लगती थी..चौपाटी की स्थिति बाद में बनी,इसलिए इसे धरोहर कैसे बताया जा सकता है ।सराफा चौपाटी विवाद का हल फिलहाल दूर दिखाई दे रहा है। निगम अपनी जगह अड़ा है और व्यापारी अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह तकरार शहर की पहचान बने सराफा को एक बड़े कानूनी और आंदोलनकारी संघर्ष में बदल सकती है।


