सागर/हर्षित पांडेय/खबर डिजिटल/ सागर में कुछ समय पहले तक दिग्गज नेता मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के बीच महासंग्राम छिड़ा हुआ था। दोनों ही नेता एक-दूसरे को पटखनी देने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे। नतीजा यह था कि लगातार जिले समेत प्रदेश में बीजेपी की किरकिरी हो रही थी। पार्टी आलाकमान तक स्थानीय संगठन के नेता खबर पहुंचा रहे थे, कि अगर इन दिग्गजों के बीच जंग खत्म नहीं हुई तो पार्टी को आगामी वक्त में नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिसके बाद प्रदेश स्तरीय संगठन ने जो कुछ किया वो सबके सामने है, कि कैसे दोनों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया, लेकिन सवाल बनता है कि क्या वाकई 27 साल पुरानी यह अदावत खत्म हो चुकी है।
गोविंद सिंह राजपूत-भूपेंद्र सिंह के बीच 27 साल पुरानी अदावत
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की राजनीतिक दुश्मनी 27 साल पुरानी है। दोनों ही सुरखी विधानसभा से एक-दूसरे के खिलाफ दो चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें दोनों को ही एक-एक बार हार का मुंह देखना पड़ा। उस समय राजपूत ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े, तो भूपेंद्र सिंह भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में थे। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी है, दोनों ही कद्दावर भगवा ब्रिगेड के मेंबर हैं, तो लड़ाई कुछ अलग ढंग की तो होना ही थी, या कहें कि एक ही घर में रहकर बर्तन बजने वाली स्थिति निर्मित होना थी, जिसके चलते सागर की लाख बंजारा झील के आसपास सियासत का बाजार गर्म होना लाजिमी था।
मंत्री पद की रेस में जीत गए थे गोविंद सिंह राजपूत
पिछली बीजेपी की सरकार के समय सागर जिला मंत्रियों से भरपूर था, जिले को तीन-तीन मंत्री जो मिले हुए थे, भूपेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत और गोपाल भार्गव, लेकिन अबकी बार परिस्थितियां बदली हुई है, जिले को मात्र एक ही मंत्री से संतोष करना पड़ा, वो भी सिंधिया कोटे से आने वाले मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के रुप में। जिले की सियासत के लिए यह एक नया पड़ाव था, क्योंकि दो वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री पद से नवाजा गया था, जिसके चलते जंग होना लाजिमी थी, लेकिन इससे गोपाल भार्गव ने अपनी दूरी बनाए रखी, और दूर से ही भूपेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत की लड़ाई को देखते रहे, क्योंकि माना जाता है कि उनका यही अंदाज उन्हें सालों से रहली विधानसभा से चुनाव जीता रहा है।
जिले के तीनों ही कद्दावर आते हैं अलग-अलग वर्ग से
सागर के तीनों दिग्गज भूपेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत और गोपाल भार्गव अलग-अलग वर्ग से आते हैं। जहां गोपाल भार्गव ब्राह्मण वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो गोविंद सिंह राजपूत क्षत्रिय आबादी का। इसी तरह भूपेंद्र सिंह ओबीसी वर्ग से है। ऐसे में समीकरण मुफीद होने के बाद भी सागर जिले को एक ही मंत्री मिल पाया, कहा जा रहा है कि अबकी बार पार्टी आलाकमान ने कुछ अंदरुनी रणनीति के तहत ऐसा किया था, पर उसका परिणाम क्या हुआ, सबके सामने है, कि एक ही पार्टी में रहने के बावजूद दो ताकतवर नेता एक-दूसरे के सामने आ गए, हालांकि अब परिस्थिति कुछ और नजर आ रही है।
गोविंद-भूपेंद्र में हेमंत खंडेलवाल ने कराई थी सुलह
कुछ समय पहले प्रदेश अध्यक्ष बनने के 5 महीने के बाद हेमंत खंडेलवाल सागर आए थे। यहां गुटबाजी को खत्म करने के लिए उन्होंने ‘भोजन मंत्र’ का सहारा लिया। उनकी एक पहल से बुंदेलखंड ही नहीं प्रदेश की राजनीति में एकदम से गोविंद-भूपेंद्र के बीच का सीन ही बदल गया। अभी तक जिस दुश्मनी के लिए दोनों सुर्खियों में रहते थे, अचानक गोविंद राजपूत के घर भूपेंद्र और फिर ठीक दो घंटे बाद भूपेंद्र सिंह के घर गोविंद राजपूत भोजन करते नजर आए। खंडेलवाल दोनों को लेकर एक-दूसरे के घर पहुंचे। उनके एक तरफ दाहिनी तरफ भूपेंद्र तो बाएं तरफ गोविंद राजपूत बैठकर भोजन करते और गंभीर तो कभी हास-परिहास करते नजर आए। पार्टी हाईकमान और दोनों से संदेश दिया कि अब दोनों एक हैं।
क्या अब सागर जिले में बढ़ेगा एक और मंत्री
काफी दिनों से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल विस्तार की खबरें सुर्खियों में है, ऐसे में सबसे ज्यादा नजर सागर जिले पर टिकी है, क्योंकि यहां के उलझे समीकरण को सुलझाने का यही एक मात्र रास्ता है। जानकार बताते हैं कि अबकी बार एक बार फिर या तो एक.. या दो मंत्री बढ़ा दिए जाएंगे। या फिर एकमात्र मंत्री को भी हटाकर.. किसी चौथे विधायक को मंत्री पद सौंप दिया जाएगा। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसके लिए काफी समय से पार्टी आलाकमान ने मंथन कर लिया है, जिसका परिणाम आने वाले समय में मोहन यादव के मंत्रिमंडल विस्तार में दिखाई देगा।


