उज्जैन/खबर डिजिटल/ मंगलनाथ रोड स्थित सांदीपनि आश्रम में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर समिति दर्शन, भीड़ नियंत्रण और बारिश से बचाव के लिए विशेष व्यवस्थाएं कर रही है। बारिश को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वाटरप्रूफ शेड तैयार किया जा रहा है। इससे बारिश के दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए कतार में खड़े रहने में परेशानी न हो।
कृष्ण जन्मोत्सव की धूम
सांदीपनि आश्रम का जन्मोत्सव धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार यह भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली रही है। इसी वजह से जन्मोत्सव के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। रात 12 बजे आरती की तैयारी, CM परिवार के साथ हो शामिल सकते हैं।
सीएम डॉ. मोहन यादव करेंगे आरती
पंडित राहुल व्यास के मुताबिक, हर साल की तरह इस बार भी रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण की जन्म आरती होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार के साथ आरती में शामिल होने की संभावना को देखते हुए भी मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। जन्मोत्सव के अवसर पर आश्रम परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। मंदिर में रंग-बिरंगी रोशनी के साथ फूलों की विशेष सजावट की जा रही है।
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कृष्ण, बलराम, सुदामा और गुरु सांदीपनि के लिए खास वस्त्र
जन्मोत्सव को खास बनाने के लिए मंदिर के पुजारी परिवार की ओर से भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए नीले रंग के मखमली वस्त्र तैयार करवाए जा रहे हैं। वहीं, जन्म के बाद पालने में विराजने वाले लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग के विशेष परिधान तैयार किए जा रहे हैं। जन्मोत्सव की रात भगवान को इन विशेष वस्त्रों में सजाया जाएगा।
सजावट के साथ दर्शन व्यवस्था पर भी फोकस
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ और बारिश को देखते हुए मंदिर समिति की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। परिसर में फूलों की सजावट और रोशनी का काम भी जारी है। सांदीपनि आश्रम की धार्मिक मान्यता और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े महत्व के कारण जन्मोत्सव के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर समिति का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को बारिश के बीच भी सुविधाजनक और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए जा सकें।
